Last updated: July 8th, 2026 at 12:17 pm

नई दिल्ली/मनामा: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बहरीन यात्रा को भारत की पश्चिम एशिया नीति के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा, क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा तथा उप-प्रधानमंत्री खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा सहित कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। इन बैठकों में भारत और बहरीन के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने अपने पारंपरिक मित्रतापूर्ण संबंधों को और मजबूत बनाने तथा रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और बहरीन के संबंध कई दशकों से मजबूत रहे हैं। बहरीन भारत का खाड़ी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक तथा सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग को नई गति देने पर विशेष जोर दिया। भारत ने बहरीन में निवेश बढ़ाने और भारतीय कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की इच्छा व्यक्त की, जबकि बहरीन ने भारतीय निवेशकों और उद्योगों का स्वागत करने की बात कही। दोनों देशों ने बुनियादी ढांचे, फिनटेक, डिजिटल सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।
ऊर्जा सुरक्षा दोनों देशों के बीच बातचीत का प्रमुख विषय रही। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है और बहरीन इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। बैठक में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने, स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात पर भी दोनों देशों के नेताओं के बीच गंभीर चर्चा हुई। विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की ओर से क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद के माध्यम से विवादों के समाधान का समर्थन दोहराया। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदारी को भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए आपसी समन्वय और रणनीतिक सहयोग को लगातार मजबूत किया जाना चाहिए।
विदेश मंत्री ने बहरीन में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने भारतीय नागरिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों के संबंधों की सबसे मजबूत कड़ी हैं। बहरीन में बड़ी संख्या में भारतीय विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं और वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। जयशंकर ने भारतीय समुदाय को आश्वस्त किया कि भारत सरकार उनके हितों और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है तथा किसी भी आवश्यकता की स्थिति में हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘एक्ट वेस्ट’ नीति के तहत खाड़ी देशों के साथ संबंध लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, ओमान और बहरीन जैसे देशों के साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बहरीन यात्रा को भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया क्षेत्र वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, संस्कृति, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इसके अलावा दोनों पक्षों ने नियमित उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद जारी रखने और विभिन्न संयुक्त कार्य समूहों की बैठकों को और सक्रिय बनाने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार, एस. जयशंकर की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की व्यापक पश्चिम एशिया रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक विस्तार, समुद्री सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ समन्वय और भारतीय प्रवासियों के हितों की रक्षा जैसे विषय भारत की विदेश नीति की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। ऐसे में बहरीन के साथ मजबूत होते संबंध भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दोनों देशों ने भविष्य में भी रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाने तथा साझा हितों के मुद्दों पर मिलकर कार्य करने का भरोसा जताया।
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