Last updated: September 12th, 2026 at 03:27 pm

बरेली और बदायूं में चिटफंड कंपनियों के जरिए हजारों निवेशकों से कथित करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। जेल में बंद सगे भाइयों सूर्यकांत मौर्य और शशिकांत मौर्य के खिलाफ अब गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। पुलिस के अनुसार दोनों भाइयों पर बरेली और बदायूं में कुल नौ मुकदमे दर्ज हैं। आरोप है कि अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से करीब 35 हजार लोगों से लगभग 800 करोड़ रुपये की रकम जुटाई गई और बाद में निवेशकों को उनका पैसा वापस नहीं मिला।
मामले की जांच में सामने आया है कि दोनों भाइयों ने निवेश से जुड़ी कई कंपनियां संचालित की थीं। इनमें बदायूं में अमर ज्योति कंपनी लिमिटेड और अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के नाम शामिल हैं। इसके अलावा बरेली में अमर ज्योति रुहेलखंड और अमर ज्योति हायर परचेज नाम से भी कंपनियां संचालित किए जाने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। आरोप है कि इन कंपनियों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया गया और उनसे रकम जमा कराई गई।
पुलिस के मुताबिक निवेशकों को बेहतर रिटर्न और सुरक्षित निवेश का भरोसा दिया गया था। शुरुआत में लोगों ने योजनाओं में पैसा लगाया, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में निवेशकों को अपनी जमा रकम वापस नहीं मिली। मामला सामने आने के बाद शिकायतें बढ़ने लगीं और पुलिस ने अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज किए। जांच आगे बढ़ने पर दोनों भाइयों की तलाश शुरू हुई और वे लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे।
दोनों भाइयों की गिरफ्तारी सात सितंबर को हुई थी। बदायूं पुलिस और उत्तर प्रदेश एसटीएफ की गौतमबुद्धनगर यूनिट की संयुक्त टीम ने लखनऊ के आलमबाग इलाके में स्थित एक फ्लैट से सूर्यकांत और शशिकांत को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके पास से लैपटॉप, डायरी और अन्य सामान भी बरामद किए। गिरफ्तारी से पहले दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब कथित ठगी की पूरी रकम और उसके लेन-देन का पता लगाने में जुटी है। जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां गई और किन खातों, संपत्तियों या अन्य माध्यमों के जरिए उसका इस्तेमाल किया गया। पुलिस की जांच में बरेली, बदायूं, पीलीभीत और आसपास के अन्य क्षेत्रों के निवेशकों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। अकेले बदायूं में करीब 15 हजार निवेशकों के प्रभावित होने का अनुमान बताया गया है।
गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई को लेकर पुलिस ने फिलहाल प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है। बदायूं में दर्ज पांच मामलों में से तीन मामलों की जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि दो मामलों की विवेचना जारी है। पुलिस के अनुसार इनकी जांच पूरी होने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मामले में पुलिस अब सिर्फ दोनों भाइयों तक सीमित नहीं रहना चाहती। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कंपनियों के संचालन, निवेशकों से रकम जुटाने और कथित तौर पर पैसा इधर-उधर करने में और कौन लोग शामिल थे। तीसरे भाई श्रीकांत मौर्य समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस उनसे जुड़े संभावित ठिकानों और संपत्तियों की जानकारी भी जुटा रही है।
बरेली में दर्ज मामलों में पुलिस दोनों भाइयों को बी-वारंट के जरिए वहां लाकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अदालत में आवेदन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। पुलिस की कोशिश है कि पूछताछ के दौरान निवेशकों की रकम, बैंक खातों, कंपनियों और संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएं।
पूरे मामले में निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता अपनी जमा पूंजी वापस मिलने को लेकर है। हजारों लोगों की रकम कथित तौर पर लंबे समय से फंसी हुई है। अब जांच एजेंसियों का ध्यान आरोपों की पुष्टि, पैसों के पूरे ट्रेल का पता लगाने और उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत निवेशकों के हितों की रक्षा करने पर है। हालांकि करीब 800 करोड़ रुपये की कथित ठगी का आंकड़ा जांच में सामने आया अनुमान है और मामले की अंतिम वित्तीय स्थिति विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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