Last updated: July 13th, 2026 at 01:46 pm

बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर उपचुनाव ने सोमवार को नया राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इसके साथ ही इस सीट पर चुनावी मुकाबला औपचारिक रूप से शुरू हो गया है और राज्य की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
नामांकन के दौरान दोनों दलों के समर्थकों की बड़ी संख्या मौजूद रही। प्रशांत किशोर ने नामांकन से पहले धार्मिक अनुष्ठान कर आशीर्वाद लिया और उसके बाद समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन करते हुए निर्वाचन कार्यालय पहुंचे। वहीं भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा ने भी वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया।
यह उपचुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि प्रशांत किशोर पहली बार किसी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे हैं। अब तक वे चुनावी रणनीतिकार के रूप में जाने जाते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने सीधे चुनाव लड़ने का फैसला किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके चुनाव मैदान में उतरने से इस सीट पर मुकाबला पहले की तुलना में अधिक रोचक हो गया है।
दूसरी ओर भाजपा ने हाल ही में अपना उम्मीदवार बदला था। पहले घोषित उम्मीदवार के चुनाव नहीं लड़ने के बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा। भाजपा का कहना है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरेगा। विपक्ष हालांकि उम्मीदवार बदलने के फैसले को लेकर भाजपा पर सवाल उठा रहा है, जबकि पार्टी ने इसे सामान्य संगठनात्मक निर्णय बताया है।
नामांकन प्रक्रिया के बाद अब सभी दलों ने चुनाव प्रचार को और तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। जन सुराज विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी, जबकि भाजपा अपने विकास कार्यों और संगठनात्मक मजबूती को चुनाव प्रचार का प्रमुख आधार बनाएगी। आने वाले दिनों में सभी प्रमुख नेताओं की सभाएं और रोड शो होने की संभावना है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर के संकेतक के रूप में भी देखा जा रहा है। इस चुनाव के नतीजों का असर आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। इसलिए सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस सीट पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। अब उम्मीदवारों के प्रचार अभियान, जनसभाओं और राजनीतिक रणनीतियों पर सबकी नजर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि बांकीपुर की जनता किस उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताती है और यह उपचुनाव बिहार की राजनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।
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