Last updated: July 13th, 2026 at 01:49 pm

बिहार के समस्तीपुर जिले में अवैध शराब तस्करी से जुड़े गिरोहों के बीच चल रही खूनी रंजिश ने कानून-व्यवस्था को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। पिछले चार दिनों में तीन संदिग्ध शराब तस्करों की अलग-अलग घटनाओं में हत्या के बाद पुलिस और प्रशासन ने पूरे इलाके में बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि ये हत्याएं अवैध शराब कारोबार पर कब्जे की लड़ाई और आपसी गैंगवार का परिणाम हो सकती हैं।
बिहार में वर्षों से पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन इसके बावजूद कई जिलों में अवैध शराब की तस्करी और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क लगातार सक्रिय बने हुए हैं। समस्तीपुर में हाल के दिनों में हुई घटनाओं ने एक बार फिर इस अवैध कारोबार की गंभीरता को उजागर किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मारे गए लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड, उनके आपसी संबंधों और हाल के विवादों की विस्तार से जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन हत्याओं के पीछे किसी बड़े गिरोह का हाथ है या फिर यह स्थानीय स्तर पर वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है।
लगातार हुई इन हत्याओं के बाद दरभंगा रेंज के डीआईजी ने समस्तीपुर सहित आसपास के जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में अवैध शराब के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने, तस्करों की पहचान कर उनके खिलाफ विशेष अभियान चलाने तथा सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए। पुलिस टीमों को संवेदनशील गांवों और संभावित तस्करी मार्गों पर लगातार छापेमारी करने तथा संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है।
पुलिस का कहना है कि जांच कई अलग-अलग पहलुओं से की जा रही है। घटनास्थलों से मिले साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल और स्थानीय लोगों से पूछताछ के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।
इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में भी भय और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस से रात में गश्त बढ़ाने, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और अवैध शराब के कारोबार पर स्थायी रूप से रोक लगाने की मांग की है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार से कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। विपक्ष ने सरकार से तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं सरकार और पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष अभियान चलाया जा रहा है तथा अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए कई विशेष टीमें गठित की गई हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में समस्तीपुर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई है। कई स्थानों पर छापेमारी कर शराब की खेप जब्त की गई और कई तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया। इसके बावजूद कुछ गिरोह लगातार अपना नेटवर्क संचालित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कारण अब पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल अपराधियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क, सप्लाई चेन और वित्तीय स्रोतों पर भी कार्रवाई करना आवश्यक है। यदि तस्करी के पूरे तंत्र को ध्वस्त नहीं किया गया तो इस प्रकार की घटनाएं दोबारा सामने आ सकती हैं। इसलिए पुलिस अब आर्थिक अपराध शाखा और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर भी जांच कर रही है।
समस्तीपुर और आसपास के इलाकों में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं और संदिग्ध तस्करी नेटवर्क की पहचान की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस गैंगवार से जुड़े मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे मामले के पीछे की साजिश, गिरोहों की भूमिका और अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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