Last updated: July 10th, 2026 at 03:50 pm

बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का राजनीतिक माहौल अब पूरी तरह गरमा गया है। गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने चुनाव को लेकर भाजपा की गंभीरता और एकजुटता का संदेश दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस उपचुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
नामांकन दाखिल करने से पहले अभिषेक कुमार सिन्हा ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे समर्थकों और पार्टी नेताओं के साथ नामांकन केंद्र पहुंचे। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद, जद(यू) प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, लोजपा (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी सहित एनडीए के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। नेताओं ने दावा किया कि गठबंधन पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरा है और जनता का समर्थन एनडीए के साथ है।
बांकीपुर सीट इस बार विशेष चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है। लंबे समय से भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसे प्रतिष्ठा का चुनाव बना दिया है और सभी अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर चुके हैं।
भाजपा उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने नामांकन के बाद कहा कि उन्हें पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के कार्यकर्ता पूरे वर्ष जनता के बीच सक्रिय रहते हैं और विकास के मुद्दे पर जनता का समर्थन पार्टी को मिलेगा। उन्होंने कहा कि बांकीपुर में भाजपा का संगठन मजबूत है और एनडीए पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगा।
दूसरी ओर, विपक्षी दल भी चुनाव को लेकर पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया है, जबकि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने से मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार चुनाव में विकास, स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक क्षमता के साथ-साथ उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि भी अहम भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, बांकीपुर शहरी क्षेत्र होने के कारण यहां शिक्षित मतदाताओं की संख्या अधिक है और चुनावी मुद्दे भी अन्य क्षेत्रों से अलग हो सकते हैं। रोजगार, बुनियादी ढांचा, ट्रैफिक, जल निकासी, पेयजल और नागरिक सुविधाएं प्रमुख चुनावी मुद्दों के रूप में उभर सकते हैं। सभी राजनीतिक दल इन्हीं मुद्दों को लेकर मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित की गई है। आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और तेज होने की संभावना है। सभी प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेता पटना में जनसभाएं और रोड शो कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह बिहार की आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर भी प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि राज्य की लगभग सभी प्रमुख पार्टियों की नजर इस चुनाव पर टिकी हुई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किस दल और किस उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताते हैं।
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