Last updated: September 11th, 2026 at 04:08 pm

बिहार सरकार ने वकालत की शुरुआत करने वाले युवा अधिवक्ताओं के लिए बड़ी पहल की है। राज्य में नए वकीलों को शुरुआती दौर में आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से हर महीने 5,000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा। यह राशि पात्र अधिवक्ताओं को तीन साल तक मिल सकती है। योजना की शुरुआत इसी महीने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा किए जाने की जानकारी महाधिवक्ता एसडी संजय ने दी है।
इस योजना का लाभ उन नए वकीलों को मिलेगा, जिन्होंने 1 जनवरी 2024 या उसके बाद बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकरण कराया है। हालांकि केवल पंजीकरण होना पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को योजना में निर्धारित अन्य पात्रता शर्तों को भी पूरा करना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 22 से 32 वर्ष की आयु के नए वकील इस योजना के दायरे में होंगे।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य वकालत के शुरुआती वर्षों में युवा अधिवक्ताओं को आर्थिक सहारा देना है। नए वकीलों को अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने, नियमित क्लाइंट बनाने और अदालतों में काम का अनुभव हासिल करने में समय लगता है। ऐसे समय में हर महीने मिलने वाली 5,000 रुपये की सहायता उनके शुरुआती खर्चों को संभालने में मदद कर सकती है।
पात्र अधिवक्ताओं को यह सहायता अधिकतम तीन वर्षों तक मिलेगी। यानी पूरी अवधि में किसी पात्र वकील को कुल 1.80 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है। हालांकि वास्तविक लाभ योजना की शर्तों और आवेदन की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
स्टाइपेंड पाने के लिए आवेदन प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। आवेदक को 100 रुपये का आवेदन फॉर्म लेकर उसे आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा करना होगा। इसमें मैट्रिक परीक्षा का प्रमाण पत्र, बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकरण का प्रमाण पत्र, अनुभव या सक्रिय प्रैक्टिस का प्रमाण पत्र, माता-पिता का आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पैन कार्ड और ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन यानी AIBE का प्रमाण पत्र शामिल हैं।
इसके अलावा आवेदक को यह शपथपत्र भी देना होगा कि वह किसी आपराधिक मामले में शामिल नहीं है और वकालत के अलावा किसी दूसरे व्यवसाय या पेशे में संलग्न नहीं है। आवेदन के साथ रद्द चेक भी जमा करना होगा। संबंधित अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष और महासचिव के हस्ताक्षर भी आवेदन पर आवश्यक बताए गए हैं।
सरकार ने केवल युवा वकीलों को आर्थिक सहायता देने तक योजना को सीमित नहीं रखा है। अधिवक्ता संघों को ई-लाइब्रेरी विकसित करने के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता देने की योजना भी शामिल है। इससे अधिवक्ताओं को कानूनी किताबों, दस्तावेजों और डिजिटल कानूनी संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।
महिला अधिवक्ताओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए शौचालय और चेंबर से जुड़ी सुविधाओं में सुधार की योजनाएं भी शामिल की गई हैं। सरकार की ओर से बिहार अधिवक्ता कल्याण न्यास समिति को 30 करोड़ रुपये की राशि पहले ही दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
महाधिवक्ता एसडी संजय ने बताया कि योजना नई है, इसलिए शुरुआत में आवेदन और क्रियान्वयन से जुड़ी कुछ व्यावहारिक परेशानियां सामने आ सकती हैं। हालांकि सरकार पात्र युवा वकीलों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बिहार सरकार की यह योजना उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद अदालतों में अपनी स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू कर रहे हैं। शुरुआती वर्षों में आर्थिक दबाव कम होने से युवा अधिवक्ताओं को अपने पेशे में टिके रहने और अनुभव हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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