Last updated: September 11th, 2026 at 04:07 pm

बिहार में सरकारी शिक्षिका की नियुक्ति से जुड़े एक मामले में पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने उस शिक्षिका की बर्खास्तगी रद्द कर दी, जिसकी नियुक्ति वर्ष 2003 में महज 16 साल और पांच महीने की उम्र में हुई थी। करीब 19 साल तक सरकारी सेवा करने के बाद वर्ष 2022 में उनकी नियुक्ति को कम उम्र के आधार पर समाप्त कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को उचित नहीं माना और शिक्षिका को राहत दी।
मामला उस समय का है जब शिक्षिका की नियुक्ति सरकारी शिक्षक के पद पर हुई थी। नियुक्ति के समय उनकी उम्र निर्धारित न्यूनतम आयु से कम थी। बाद में यह तथ्य सामने आने के बाद विभाग ने उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाया। इसी आधार पर वर्ष 2022 में उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। इसके खिलाफ शिक्षिका ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या नियुक्ति के समय कम उम्र का होना ऐसी मूलभूत कानूनी गलती है, जिसके आधार पर लगभग दो दशक तक सेवा करने के बाद कर्मचारी को बर्खास्त किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए इसे नियुक्ति को पूरी तरह अवैध बनाने वाली गलती नहीं माना।
अदालत ने कहा कि नियुक्ति के समय उम्र से जुड़ी कमी को इस मामले में एक ऐसी अनियमितता माना जा सकता है, जिसे लगभग दो दशक की सेवा के बाद बर्खास्तगी का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने इसे “mere irregularity” यानी महज अनियमितता माना, न कि ऐसी मूलभूत अवैधता जिसके कारण पूरी सेवा समाप्त कर दी जाए।
इस मामले में शिक्षिका ने वर्ष 2003 से लगातार सरकारी सेवा की थी। लंबे समय तक सेवा करने के बाद अचानक नियुक्ति की उम्र से जुड़ी पुरानी कमी के आधार पर कार्रवाई होने से उनके रोजगार और भविष्य पर सीधा असर पड़ा। हाईकोर्ट ने इसी लंबे सेवा काल और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया।
हालांकि अदालत ने शिक्षिका की सेवा से जुड़ी एक सीमा भी निर्धारित की है। उनके कुल सेवा काल को 42 वर्ष की उम्र तक सीमित किया गया है। यानी अदालत के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि नियुक्ति के समय उम्र संबंधी नियमों को सामान्य रूप से नजरअंदाज किया जा सकता है। फैसला इस विशेष मामले के तथ्यों और लंबे समय तक चली सेवा को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
यह फैसला सरकारी नियुक्तियों में नियमों के पालन और लंबे समय तक सेवा कर चुके कर्मचारियों के अधिकारों के बीच संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता और उम्र की शर्तों का पालन जरूरी है, लेकिन किसी कर्मचारी की वर्षों पुरानी नियुक्ति में सामने आई कमी पर लंबे समय बाद की गई कार्रवाई के प्रभाव को भी अदालतों द्वारा परिस्थितियों के आधार पर देखा जा सकता है।
बिहार में शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर पहले भी उम्र, योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में अदालतें नियुक्ति के समय लागू नियमों के साथ-साथ यह भी देखती हैं कि कर्मचारी ने कितने समय तक सेवा की और विभाग की ओर से कार्रवाई कितने समय बाद की गई।
पटना हाईकोर्ट के इस फैसले से शिक्षिका को तत्काल बड़ी राहत मिली है। उनकी वर्ष 2022 की बर्खास्तगी को अदालत ने रद्द कर दिया है और उनकी लंबी सरकारी सेवा को देखते हुए उन्हें केवल नियुक्ति के समय कम उम्र होने के आधार पर सेवा से बाहर रखने को उचित नहीं माना।
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