Last updated: September 24th, 2026 at 03:17 pm

बिहार सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में दो नए विश्वविद्यालय स्थापित करने को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 23 सितंबर को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में कुल 24 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें पटना में माता सीता महिला विश्वविद्यालय और बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव प्रमुख रहा। दोनों विश्वविद्यालयों की स्थापना बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के तहत की जाएगी।
पटना में बनने वाला माता सीता महिला विश्वविद्यालय बिहार का पहला महिला विश्वविद्यालय होगा। इसका उद्देश्य महिला विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों को एक अलग विश्वविद्यालय के माध्यम से व्यवस्थित करना है। विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में पटना जिले के अंगीभूत और संबद्ध महिला महाविद्यालयों को शामिल किया जाएगा। हालांकि पटना विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले महिला कॉलेज इसके क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं होंगे और वे पहले की तरह पटना विश्वविद्यालय से जुड़े रहेंगे।
कैबिनेट ने माता सीता महिला विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े शुरुआती खर्च के लिए 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। यह राशि विश्वविद्यालय की शुरुआती स्थापना तथा अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन आदि से जुड़े खर्चों के लिए मंजूर की गई है। आगे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे, अधिकारियों की नियुक्ति और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
दूसरा विश्वविद्यालय बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर स्थापित किया जाएगा। रामधारी सिंह दिनकर का बेगूसराय से गहरा संबंध रहा है और उनके नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना लंबे समय से स्थानीय स्तर पर उठने वाली मांगों में शामिल रही है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद बेगूसराय और आसपास के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा से जुड़ा एक नया संस्थागत विकल्प तैयार होने की प्रक्रिया शुरू होगी।
रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार बेगूसराय और खगड़िया जिलों में स्थित अंगीभूत तथा संबद्ध महाविद्यालयों तक होगा। हालांकि कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध या उसके अंगीभूत कॉलेज इसके क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं किए जाएंगे। इस व्यवस्था के जरिए दोनों जिलों के संबंधित डिग्री कॉलेजों को नए विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे से जोड़ा जाएगा।
दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भी सरकार ने 15 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। यह राशि शुरुआती स्थापना और अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन आदि से जुड़े खर्चों के लिए निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय के संचालन के लिए आगे आवश्यक प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचा तैयार किया जाएगा।
दो नए विश्वविद्यालयों की मंजूरी केवल शिक्षा विभाग से जुड़ा फैसला नहीं है, बल्कि इसके साथ कई अन्य प्रस्ताव भी कैबिनेट ने स्वीकृत किए। बैठक में पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 50 आधुनिक ड्रोन खरीदने को मंजूरी दी गई। इन ड्रोन का इस्तेमाल भीड़ नियंत्रण, नदी क्षेत्र में अभियान, अपराध विरोधी कार्रवाई, नक्सल विरोधी अभियान और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों में किया जा सकेगा। इसके लिए 24.50 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
कैबिनेट ने कोसी क्षेत्र में डेयरी विकास से जुड़ी कई योजनाओं को भी मंजूरी दी। सुपौल, मधेपुरा और सहरसा में दही प्लांट, प्रीमियम आइसक्रीम प्लांट, मिल्क चिलिंग प्लांट और अन्य डेयरी सुविधाओं के विकास के लिए करीब 126.07 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च को स्वीकृति दी गई है।
इसके अलावा राज्य के 12 चिकित्सा संस्थानों में ई-सुश्रुत एनएक्स एप्लीकेशन लागू करने की योजना को भी मंजूरी मिली है। इसके लिए तीन वर्षों में करीब 29.79 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है। इससे चिकित्सा संस्थानों में डिजिटल प्रक्रियाओं को लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।
कैबिनेट के फैसलों में नवादा जिले में चीनी मिल की स्थापना के लिए सरकारी जमीन के हस्तांतरण को मंजूरी और बिहार जल संसाधन विकास निगम के गठन जैसे प्रस्ताव भी शामिल रहे। इसके अलावा पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने, मत्स्य क्षेत्र में परियोजनाओं और पशुधन सर्वेक्षण से जुड़े प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।
पटना और बेगूसराय में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए कैबिनेट स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है। अब इनके प्रशासनिक ढांचे, अधिकारियों की नियुक्ति, कॉलेजों के क्षेत्राधिकार और शैक्षणिक संचालन से जुड़ी अगली प्रक्रियाएं आगे बढ़ेंगी। दोनों विश्वविद्यालयों के पूरी तरह संचालन में आने के बाद संबंधित जिलों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का नया संस्थागत ढांचा उपलब्ध होगा।
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