Last updated: November 4th, 2026 at 02:47 pm

2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए पथ निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता विजय कुमार के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में यह कार्रवाई पटना, सहरसा और औरंगाबाद में की गई। जांच एजेंसी के शुरुआती आकलन के मुताबिक, अधिकारी के पास उनकी ज्ञात आय से लगभग 139.87 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने का पता चला है। इसका अनुमानित मूल्य 3 करोड़ 28 लाख 70 हजार 600 रुपये बताया गया है।
विशेष निगरानी इकाई की अलग-अलग टीमों ने सुबह अधिकारी से जुड़े आवासीय और सरकारी परिसरों में तलाशी अभियान शुरू किया। विजय कुमार वर्तमान में पथ निर्माण अंचल, सहरसा में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात हैं। उनके खिलाफ SVU थाना कांड संख्या 27/2026 के तहत 3 नवंबर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। प्रारंभिक सत्यापन में आय और संपत्ति के बीच असामान्य अंतर मिलने के बाद न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया।
छापेमारी के दौरान पटना में दानापुर के गोला रोड स्थित साईं शरणम् आवासीय परिसर और महेश नगर स्थित प्रेमा रेजिडेंसी में तलाशी ली गई। इसके अलावा सहरसा स्थित उनके सरकारी कार्यालय और आवास तथा औरंगाबाद जिले के दाउदनगर स्थित पैतृक आवास को भी जांच के दायरे में रखा गया। इस तरह कुल पांच परिसरों में एक साथ कार्रवाई की गई। जांच टीम ने बैंक खातों, जमीन-जायदाद, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की।
तलाशी के दौरान पटना स्थित साईं शरणम् आवास से 31 लाख 42 हजार रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ इंडिया में कुल 10 लाख रुपये की सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले हैं। जांच एजेंसी को लगभग 23 लाख 23 हजार रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और एलआईसी तथा टाटा एआईए जैसी कंपनियों में निवेश से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं।
जांच के दौरान अधिकारी की पत्नी रानी कुमारी के नाम पर मौजूद संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी सामने आए हैं। इनमें जमीन के भूखंड, फ्लैट और बैंक खातों से संबंधित रिकॉर्ड शामिल बताए गए हैं। SVU इन दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संपत्तियां किन स्रोतों से खरीदी गईं और क्या उनका मूल्य अधिकारी की ज्ञात आय के अनुरूप है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, विजय कुमार ने 22 दिसंबर 2004 को सरकारी सेवा में योगदान दिया था। इसके बाद उनकी पदस्थापना पटना, गया, सहरसा और अन्य स्थानों पर रही। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने कथित तौर पर अपनी वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। सत्यापन में सामने आई 3.28 करोड़ रुपये से अधिक की अप्रत्याशित संपत्ति उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से 139.87 प्रतिशत अधिक बताई गई है। हालांकि, यह जांच एजेंसी का प्रारंभिक आकलन है और आरोपों की अंतिम पुष्टि कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
इस कार्रवाई से पथ निर्माण विभाग में हलचल मच गई है। SVU की टीमें अलग-अलग ठिकानों से मिले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं। जांच का उद्देश्य अधिकारी की घोषित आय, बैंक खातों, निवेश और चल-अचल संपत्तियों के बीच संबंध स्थापित करना है। एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि संपत्ति खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत क्या थे।
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी एजेंसियों की कार्रवाई के बीच यह मामला सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। फिलहाल तलाशी में मिली सामग्री की जांच जारी है। SVU की आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और जुटाए गए साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
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