Last updated: September 4th, 2026 at 03:55 pm

बिहार में फरक्का जलसंधि और गंगा के पानी से जुड़े मुद्दे को लेकर सियासत एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने फरक्का समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने रुख का हवाला देते हुए बिहार के हितों से जुड़े सवाल को प्रमुखता से उठाया गया है। गंगा के पानी, नदी प्रबंधन और बिहार में बाढ़ की समस्या को लेकर यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का हिस्सा रहा है।
JDU का कहना है कि फरक्का से जुड़े विषय को केवल जल बंटवारे के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसका संबंध बिहार में बाढ़, गंगा नदी की स्थिति और राज्य के व्यापक हितों से भी है। पार्टी ने नीतीश कुमार के पुराने रुख को सामने रखते हुए केंद्र से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। बिहार में मानसून के दौरान बाढ़ की समस्या को देखते हुए गंगा और उसकी सहायक नदियों के प्रबंधन का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
फरक्का बैराज पश्चिम बंगाल में गंगा नदी पर स्थित एक महत्वपूर्ण जल संरचना है। इसका निर्माण गंगा के पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने और हुगली नदी में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। इसके बाद भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर समझौते हुए। बिहार में लंबे समय से यह तर्क दिया जाता रहा है कि फरक्का से जुड़े जल प्रबंधन का प्रभाव राज्य में गंगा के प्रवाह और बाढ़ की स्थिति पर पड़ता है।
JDU ने इसी संदर्भ में केंद्र सरकार के सामने बिहार के हितों को प्राथमिकता देने की बात रखी है। पार्टी का कहना है कि राज्य में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए गंगा के प्रवाह और नदी प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं पर व्यापक तरीके से विचार किया जाना चाहिए। इसके लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई गई है।
नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार में बाढ़ और नदी प्रबंधन के मुद्दों को उठाते रहे हैं। बिहार में हर साल मानसून के दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आते हैं। नेपाल से आने वाली कई नदियों के साथ-साथ गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण राज्य के कई जिलों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में नदी प्रबंधन और जल संसाधनों से जुड़े फैसलों को बिहार की राजनीति में काफी महत्व दिया जाता है।
JDU की ओर से फरक्का जलसंधि को लेकर दबाव बढ़ाने की रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार में बाढ़ और जल प्रबंधन का मुद्दा फिर चर्चा में है। पार्टी इस मुद्दे के जरिए केंद्र के सामने राज्य की चिंताओं को मजबूती से रखने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह संदेश देने का प्रयास भी किया जा रहा है कि बिहार के जल संसाधनों और बाढ़ से जुड़े हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच बातचीत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। गंगा जल प्रबंधन कई राज्यों और पड़ोसी देशों से जुड़े व्यापक विषयों से संबंधित है, इसलिए किसी भी बड़े निर्णय के लिए तकनीकी, पर्यावरणीय और अंतरराज्यीय पहलुओं पर विचार करना आवश्यक होता है। बिहार की ओर से उठाई जा रही मांग को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।
फरक्का को लेकर बिहार की चिंता का एक प्रमुख पहलू बाढ़ प्रबंधन भी है। राज्य में बाढ़ के कारण हर वर्ष लोगों के घर, सड़कें, खेती और स्थानीय बुनियादी ढांचा प्रभावित होता है। बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों पर सरकार को बड़े स्तर पर संसाधन खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में राज्य सरकार लंबे समय से स्थायी समाधान और प्रभावी नदी प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर देती रही है।
JDU द्वारा नीतीश कुमार के पुराने रुख का हवाला दिए जाने से इस मुद्दे को राजनीतिक महत्व भी मिल गया है। पार्टी के लिए यह बिहार के हितों से जुड़े पुराने मुद्दे को दोबारा प्रमुखता से सामने रखने का अवसर है। आने वाले दिनों में यदि केंद्र की ओर से इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया आती है तो बिहार की राजनीति में इसे लेकर चर्चा और तेज हो सकती है।
फरक्का जलसंधि और गंगा जल प्रबंधन को लेकर JDU का रुख स्पष्ट है कि बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर केंद्र को गंभीरता से विचार करना चाहिए। पार्टी की मांग और राजनीतिक दबाव के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और बिहार की बाढ़ तथा नदी प्रबंधन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
![]()
Comments are off for this post.