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बिहार में बाढ़ का कहर, 11 जिलों में 19.57 लाख लोग प्रभावित; पटना में गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड

बिहार में बाढ़ की स्थिति रविवार को और गंभीर हो गई। राज्य के 11 जिलों में करीब 19.57 लाख लोग
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बिहार में बाढ़ की स्थिति रविवार को और गंभीर हो गई। राज्य के 11 जिलों में करीब 19.57 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। सबसे बड़ी चिंता पटना में गंगा नदी के जलस्तर को लेकर है, जहां गांधी घाट पर नदी का पानी अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर पहुंच गया। इसके बाद प्रशासन ने गंगा के निचले इलाकों और downstream क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों को तटबंधों, संवेदनशील स्थानों और निचले इलाकों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

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    अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ का असर पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया जिलों में पड़ा है। इन जिलों की 330 ग्राम पंचायतों में लगभग 19.57 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण प्रशासन को आशंका है कि आने वाले दिनों में कुछ और निचले इलाकों में पानी पहुंच सकता है। खासतौर पर गंगा के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।

    पटना के गांधी घाट पर रविवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया। यह 2016 में दर्ज किए गए 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से 0.05 मीटर अधिक है। फिलहाल गांधी घाट पर जलस्तर का रुझान स्थिर बताया गया है, लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि हथीदह और उसके आगे के गेज स्टेशनों पर अगले एक से तीन दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    पटना के पंडारक में भी गंगा का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर पहुंच गया है। यहां रविवार सुबह पानी 43.92 मीटर दर्ज किया गया, जबकि पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर 43.73 मीटर था। इसके चलते बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जैसे डाउनस्ट्रीम जिलों में प्रशासन को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

    बिहार की कई अन्य नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां शामिल हैं। जलस्तर बढ़ने के कारण ग्रामीण और निचले इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों को नदियों और तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से बचने की सलाह दी है। नावों के संचालन के दौरान ओवरलोडिंग रोकने और लोगों को लगातार जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    राहत और बचाव अभियान को तेज करने के लिए बड़ी संख्या में नावें और आपदा राहत दल तैनात किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित इलाकों में लोगों के आवागमन और जरूरत पड़ने पर निकासी के लिए 1,345 नावों को लगाया गया है। इसके अलावा राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की 27 टीमें और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की 10 टीमें अलग-अलग जिलों में तैनात हैं।

    बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए विभिन्न जिलों में 110 सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं। इन रसोइयों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन को राहत सामग्री और बचाव संसाधनों को तैयार रखने तथा जरूरत के अनुसार संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

    बाढ़ का असर रेल यातायात पर भी पड़ा है। पटना-गया रेलखंड पर पुनपुन और परसा बाजार स्टेशनों के बीच एक पुल के पास जलस्तर बेहद बढ़ने के कारण कुछ ट्रेनों को रद्द या डायवर्ट किया गया है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती गंगा और दूसरी नदियों के जलस्तर को नियंत्रित रूप से मॉनिटर करना तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। फिलहाल प्रशासन ने तटबंधों और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी है। गंगा के पुराने रिकॉर्ड से ऊपर बहने और 11 जिलों में करीब 19.57 लाख लोगों के प्रभावित होने के बाद बिहार में आने वाले कुछ दिन राहत और बचाव व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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