Last updated: September 10th, 2026 at 03:38 pm

बिहार के वैशाली जिले में गुरुवार को निर्माणाधीन पुल पर बड़ा हादसा हो गया। लालगंज क्षेत्र के जलालपुर में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे चार लेन के पुल पर काम के दौरान लॉन्चिंग गर्डर मशीन अचानक असंतुलित होकर गिर गई। हादसे में सात मजदूर घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के मुताबिक अब तक किसी मजदूर की मौत की सूचना नहीं है।
यह हादसा हाजीपुर के बाकरपुर-माणिकपुर सेक्शन में NH-139W पर हुआ। यह सड़क परियोजना भारतमाला कार्यक्रम का हिस्सा है। निर्माणाधीन पुल पर इस्तेमाल होने वाली लॉन्चिंग गर्डर मशीन का काम भारी गर्डर और निर्माण सामग्री को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने और स्थापित करने में मदद करना होता है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब मशीन को स्थानांतरित किया जा रहा था।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI की ओर से सामने आई जानकारी में हादसे के पीछे लॉन्चिंग गर्डर सिस्टम में तकनीकी समस्या की बात कही गई है। हालांकि, यह शुरुआती जानकारी है और हादसे के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। इसलिए फिलहाल तकनीकी खराबी को अंतिम कारण मानना जल्दबाजी होगी।
हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासन की टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायल मजदूरों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, सात मजदूर घायल हुए और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनकी चोटों की गंभीरता अलग-अलग बताई गई है और कुछ घायलों को बेहतर उपचार के लिए रेफर किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
NHAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि हादसे में पुल की मुख्य संरचना को नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं है। यानी शुरुआती आकलन के अनुसार दुर्घटना निर्माणाधीन पुल की स्थायी संरचना के गिरने से नहीं, बल्कि निर्माण में इस्तेमाल हो रही लॉन्चिंग मशीन के असंतुलित होकर गिरने से जुड़ी है। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि घटना को सीधे पूरे पुल के ढहने के रूप में बताना उपलब्ध आधिकारिक जानकारी से मेल नहीं खाएगा।
हादसे के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। निर्माण परियोजनाओं में भारी मशीनरी के इस्तेमाल के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होता है। NHAI ने कहा है कि घटना के बाद सुरक्षा मानकों और काम करने की प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
इस हादसे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्ष की ओर से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, किसी राजनीतिक आरोप को हादसे के कारण की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। वास्तविक कारण तकनीकी जांच और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
बिहार में निर्माणाधीन और पुराने पुलों से जुड़े हादसों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में वैशाली की घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों, मशीनरी की जांच और निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। खासतौर पर बड़े राजमार्ग और पुल निर्माण प्रोजेक्ट में भारी मशीनों के संचालन से पहले उनकी तकनीकी स्थिति और कार्यप्रणाली की जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसियों का ध्यान घायलों के उपचार और हादसे के कारणों की जांच पर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लॉन्चिंग गर्डर के असंतुलित होने के पीछे तकनीकी खराबी, संचालन संबंधी समस्या या कोई अन्य कारण था। तब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि वैशाली में निर्माणाधीन NH-139W पुल परियोजना के दौरान लॉन्चिंग मशीन गिरने से सात मजदूर घायल हुए और पुल की मुख्य संरचना को नुकसान होने की सूचना नहीं है।
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