Last updated: October 31st, 2026 at 02:49 pm

बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा 2023 के पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी के पटना जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 2.01 करोड़ रुपये बताया गया है। ये संपत्तियां एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड (NC Print Private Limited) के नाम पर दर्ज हैं, जिसे जांच एजेंसी ने आरोपी कौशिक कुमार कर के नियंत्रण और लाभकारी स्वामित्व वाली कंपनी बताया है। ईडी की इस कार्रवाई से भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आर्थिक नेटवर्क की जांच एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
ईडी के मुताबिक, यह जांच बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU), पटना की ओर से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। मामले में प्रश्नपत्र लीक करने, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों की जांच पहले से चल रही थी। अब केंद्रीय एजेंसी ने कथित अपराध से प्राप्त धन के लेनदेन और उसे छिपाने के तरीकों की पड़ताल करते हुए संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत सिपाही भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्रों की छपाई का ठेका हासिल करने से हुई। आरोप है कि कौशिक कुमार कर ने कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के माध्यम से प्रश्नपत्र छपाई का ठेका हासिल करने की व्यवस्था की थी। इस कंपनी के निदेशकों के रूप में उनके सहयोगियों को नियुक्त किया गया था। ईडी का दावा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड की वास्तविक भूमिका सामने न आए। इस प्रिंटिंग प्रेस को पूर्व में अन्य परीक्षा पेपर लीक मामलों के कारण ब्लैकलिस्ट किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
ईडी के अनुसार, कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स के पास पहले से प्रश्नपत्र छापने का अनुभव नहीं था और न ही उसका अपना प्रिंटिंग प्रेस था। इसके बावजूद कंपनी को बिहार केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) की ओर से प्रश्नपत्र छपाई का ठेका मिल गया। आरोप है कि कंपनी ने बाद में यह काम ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को सौंप दिया, जो मूल अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन था। एजेंसी इस व्यवस्था को कथित साजिश का हिस्सा मानकर जांच कर रही है।
जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन के अनुसार, प्रश्नपत्र छपाई के लिए कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स को करीब 5.90 करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान किया गया था। ईडी का आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा ही ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को भेजा गया, जबकि लगभग 2.01 करोड़ रुपये अलग-अलग कथित फर्जी कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिए गए। एजेंसी के मुताबिक, इन कंपनियों के जरिए कई लेनदेन किए गए और रकम को अंततः नकदी में बदलकर उसके वास्तविक स्रोत तथा इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश की गई।
ईडी की जांच में कोलकाता स्थित कुछ कथित शेल कंपनियों का नेटवर्क भी सामने आया है। एजेंसी का कहना है कि इन कंपनियों के पास वास्तविक कारोबारी गतिविधियां नहीं थीं, लेकिन इनके माध्यम से धन को कई स्तरों पर स्थानांतरित किया गया। चूंकि कथित रूप से डायवर्ट की गई रकम का आगे पूरा पता नहीं लगाया जा सका, इसलिए एजेंसी ने उसके बराबर मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने का फैसला किया। ये संपत्तियां एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी बताई गई हैं।
यह मामला वर्ष 2023 की बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। इस भर्ती के तहत कुल 21,391 पदों पर नियुक्ति होनी थी। लिखित परीक्षा 1 अक्टूबर 2023 को आयोजित की गई थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक और नकल की शिकायतें सामने आने के बाद केंद्रीय चयन पर्षद ने परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके बाद 7 और 15 अक्टूबर को होने वाली परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई थीं। इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों की तैयारी और भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई।
बाद में परीक्षा दोबारा आयोजित करने का कार्यक्रम जारी किया गया। लिखित परीक्षा अगस्त 2024 में अलग-अलग तारीखों पर कराई गई और नवंबर 2024 में परिणाम घोषित किए गए। इस पूरे घटनाक्रम ने भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की छपाई और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
ईडी की ताजा कार्रवाई के बाद मामले में जांच का दायरा आर्थिक लेनदेन और संबंधित कंपनियों की भूमिका तक पहुंच गया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और कथित धन शोधन से जुड़े अन्य लोगों तथा संस्थाओं की भूमिका भी खंगाली जा रही है। फिलहाल पांच संपत्तियों की अस्थायी जब्ती की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
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