Last updated: July 12th, 2026 at 06:58 pm

ब्राज़ील में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक दक्षिण (Global South) से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत ने बैठक के दौरान बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और विकासशील देशों की आवाज़ को वैश्विक मंचों पर अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने की आवश्यकता है। उन्होंने व्यापार को सरल बनाने, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन को बढ़ावा देने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बीच विकासशील देशों के बीच मजबूत साझेदारी समय की आवश्यकता है।
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, इथियोपिया और अन्य देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें भी कीं। इन बैठकों में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, रक्षा सहयोग को मजबूत करने, कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में साझेदारी का विस्तार करने पर चर्चा हुई। भारत ने विभिन्न देशों के साथ निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
बैठक में वैश्विक आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों से एकजुट होकर कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी दोहराई, ताकि विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
भारत ने ब्रिक्स मंच पर डिजिटल भुगतान प्रणाली, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और फिनटेक क्षेत्र में अपने अनुभव भी साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की डिजिटल पहलें करोड़ों लोगों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने में सफल रही हैं और इन मॉडलों का लाभ अन्य विकासशील देश भी उठा सकते हैं। कई सदस्य देशों ने भारत की डिजिटल उपलब्धियों में रुचि दिखाई और भविष्य में सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है। विभिन्न देशों के साथ हुई द्विपक्षीय बैठकों से व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत लगातार वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूत करने और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
ब्रिक्स सम्मेलन के बाद भारत विभिन्न देशों के साथ हुए समझौतों और चर्चाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार का मानना है कि इन बैठकों से आर्थिक सहयोग, निवेश, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को और मजबूती मिलेगी। आने वाले महीनों में इन समझौतों को लागू करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की संभावना है।
![]()
Comments are off for this post.