Last updated: July 12th, 2026 at 07:03 pm

संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपना सख्त रुख दोहराते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों के वित्तपोषण पर निर्णायक कार्रवाई की अपील की है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और इसके खिलाफ सभी देशों को बिना किसी भेदभाव के एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवादी संगठनों को आर्थिक सहायता, हथियार और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर भी समान रूप से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। भारत ने कहा कि यदि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़नी है, तो सभी देशों को साझा जिम्मेदारी निभानी होगी।
भारत ने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान को और मजबूत किया जाना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे आतंकवाद के खिलाफ बनाए गए अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पूरी तरह पालन करें और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों तथा संगठनों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बैठक के दौरान भारत ने आतंकवाद के वित्तपोषण पर भी चिंता व्यक्त की। भारत का कहना है कि जब तक आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता और संसाधनों पर प्रभावी रोक नहीं लगेगी, तब तक आतंकवाद के खतरे को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं होगा। भारत ने सभी देशों से वित्तीय निगरानी को मजबूत करने और संदिग्ध लेन-देन पर कड़ी नजर रखने की अपील की।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक आतंकवाद विरोधी कन्वेंशन (Comprehensive Convention on International Terrorism – CCIT) को शीघ्र अपनाने की आवश्यकता भी दोहराई। भारत लंबे समय से इस प्रस्ताव का समर्थन करता रहा है और उसका मानना है कि एक व्यापक वैश्विक कानूनी ढांचा आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई को और प्रभावी बना सकता है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नीति लगातार स्पष्ट और सुसंगत रही है। भारत हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह आग्रह करता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस मुद्दे पर देशों के बीच सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सरकार का मानना है कि संयुक्त प्रयासों, मजबूत कानूनी व्यवस्था और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय समन्वय के माध्यम से ही आतंकवाद जैसी चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है। आने वाले समय में भारत इस विषय को विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर प्रमुखता से उठाता रहेगा।
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