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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में नया मोड़, प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ पर भारत ने जताई आपत्ति

भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। भारत सरकार ने
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भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। भारत सरकार ने अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों का समाधान एकतरफा शुल्क लगाने के बजाय आपसी बातचीत और द्विपक्षीय समझौते के माध्यम से किया जाना चाहिए।

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    यह प्रस्ताव अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की उस प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें कुछ देशों के खिलाफ आयात से जुड़े नियमों की समीक्षा की जा रही है। भारत ने अपने जवाब में कहा है कि प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क के समर्थन में पर्याप्त देश-विशिष्ट साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। भारत का मानना है कि इस प्रकार के कदम दोनों देशों के मजबूत आर्थिक संबंधों और चल रही व्यापार वार्ताओं पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश समानांतर रूप से व्यापक व्यापार समझौते के ढांचे को अंतिम रूप देने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। भारत का कहना है कि यदि किसी प्रकार की चिंता है तो उसका समाधान द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से निकाला जाना चाहिए, न कि अतिरिक्त शुल्क लगाकर।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, दवा उद्योग, इंजीनियरिंग उत्पाद, वस्त्र, कृषि उत्पाद और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। ऐसे में किसी भी नए टैरिफ का असर भारतीय निर्यातकों के साथ-साथ अमेरिकी आयातकों और उद्योगों पर भी पड़ सकता है।

    व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत फिलहाल टकराव की बजाय संवाद की नीति पर आगे बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय उद्योगों के हित सुरक्षित रहें और साथ ही अमेरिका के साथ दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारी भी मजबूत बनी रहे। इसी कारण भारत ने अमेरिकी प्रशासन से प्रस्तावित टैरिफ पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

    विश्लेषकों के अनुसार, यदि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर सहमति बनती है तो इससे निवेश, निर्यात, विनिर्माण और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। भारत और अमेरिका पहले ही द्विपक्षीय व्यापार को आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का लक्ष्य तय कर चुके हैं। इसलिए वर्तमान वार्ता को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करते हुए बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। अब सभी की नजर अमेरिका के अंतिम निर्णय और दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते की अगली दौर की वार्ता पर टिकी है। यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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