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भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती, इंडो-पैसिफिक रणनीति पर बढ़ा फोकस

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर नई बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है।
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भारत और फ्रांस के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर नई बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग और रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया है। हालिया कूटनीतिक बैठकों में रक्षा तकनीक, संयुक्त सैन्य अभ्यास और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

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    भारत और फ्रांस पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत करते रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग पहले से ही काफी गहरा माना जाता है। Rafale लड़ाकू विमान सौदा और समुद्री सुरक्षा सहयोग इस साझेदारी के प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं। अब दोनों देश नई तकनीक और रक्षा उत्पादन में सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहे हैं।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार हालिया वार्ता में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। भारत और फ्रांस दोनों इस क्षेत्र में मुक्त, सुरक्षित और संतुलित समुद्री व्यवस्था का समर्थन करते हैं। चीन की बढ़ती गतिविधियों और वैश्विक शक्ति संतुलन के बदलते समीकरणों के बीच यह साझेदारी और महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    प्रधानमंत्री Narendra Modi और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron पहले भी कई बार रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने की बात कह चुके हैं। दोनों नेताओं ने रक्षा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रांस यूरोप का ऐसा प्रमुख देश है जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सक्रिय रणनीतिक भूमिका निभा रहा है। यही कारण है कि भारत और फ्रांस के बीच समुद्री सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास और नौसैनिक गतिविधियां भी दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने का माध्यम बनी हैं।

    भारत “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इस दिशा में फ्रांस के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को आधुनिक रक्षा तकनीक हासिल करने में मदद मिल सकती है।

    हालांकि विपक्षी दल समय-समय पर बड़े रक्षा सौदों में पारदर्शिता और लागत को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने पहले भी कुछ रक्षा समझौतों पर सरकार से जवाब मांगा था। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।

    अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत-फ्रांस संबंध केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश वैश्विक मंचों पर जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद विरोधी अभियान और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर भी साथ काम कर रहे हैं। फ्रांस लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करता रहा है।

    इस बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक राजनीति का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। अमेरिका, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों की बढ़ती सक्रियता के बीच भारत और फ्रांस की साझेदारी रणनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण होती जा रही है।

    आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और समुद्री सुरक्षा सहयोग में और विस्तार देखने को मिल सकता है। फिलहाल भारत और फ्रांस अपने संबंधों को दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।

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