Last updated: May 28th, 2026 at 01:40 pm

वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। 28 मई को कारोबार के दौरान निवेशकों में सतर्कता साफ दिखाई दी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में शुरुआती तेजी के बाद मिश्रित कारोबार देखने को मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और वैश्विक बाजारों के दबाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है। तेल कीमतों में तेजी से महंगाई और आयात लागत बढ़ने की आशंका रहती है।
कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी और ऊर्जा सेक्टर के शेयरों में अलग-अलग रुझान देखने को मिले। कुछ बड़े बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखी गई, जबकि आईटी सेक्टर में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण दबाव बना रहा। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और वैश्विक ब्याज दरों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हाल के दिनों में वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के कारण विदेशी निवेशक सतर्क रणनीति अपनाते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि घरेलू निवेशकों की भागीदारी अभी भी बाजार को स्थिरता देने में मदद कर रही है।
इस बीच रुपया भी डॉलर के मुकाबले दबाव में दिखाई दिया। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है। इससे आयात लागत और व्यापार संतुलन पर असर पड़ने की संभावना है।
सरकार और वित्त मंत्रालय की ओर से फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और घरेलू मांग बाजार को समर्थन दे रही है। सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर लगातार निवेश बढ़ा रही है।
हालांकि विपक्षी दलों ने महंगाई और आर्थिक दबाव को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि वैश्विक संकट का असर आम लोगों पर पड़ रहा है और सरकार को ईंधन कीमतों तथा महंगाई नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में फिलहाल अस्थिरता बनी रह सकती है। पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिकी आर्थिक नीतियां और वैश्विक निवेश माहौल आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। इसके बावजूद कई विशेषज्ञ भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को मजबूत मान रहे हैं।
इस बीच खुदरा निवेशकों को सतर्क निवेश रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान लंबी अवधि की सोच और विविध निवेश पोर्टफोलियो महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
फिलहाल भारतीय शेयर बाजार वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात और आर्थिक आंकड़ों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
![]()
Comments are off for this post.