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यूपी में अमरमणि त्रिपाठी की सियासी वापसी, 2027 विधानसभा चुनाव में फरेंदा से लड़ने का ऐलान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी ने एक बार फिर सक्रिय वापसी के संकेत दिए हैं। अमरमणि
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी ने एक बार फिर सक्रिय वापसी के संकेत दिए हैं। अमरमणि त्रिपाठी ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में महाराजगंज जिले की फरेंदा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने रविवार को महाराजगंज में आयोजित एक जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की। उनके बेटे और पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी के भी नौतनवा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की बात सामने आई है। अमरमणि की इस घोषणा के बाद पूर्वांचल की राजनीति में एक बार फिर उनके परिवार की संभावित सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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    अमरमणि त्रिपाठी लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे। उनका राजनीतिक सफर पूर्वांचल की राजनीति में काफी प्रभावशाली रहा है। वह पहले बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे और 2002 से 2003 के बीच उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मायावती सरकार में मंत्री भी रहे। इसके बाद वह मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में दोषी ठहराए गए और उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। 2023 में जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखी थी। अब करीब 19 साल बाद उनके सार्वजनिक रूप से राजनीतिक कार्यक्रम में सामने आने को उनकी सक्रिय वापसी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    महाराजगंज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमरमणि ने कहा कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में फरेंदा से चुनाव मैदान में उतरेंगे। उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी के नौतनवा से चुनाव लड़ने की घोषणा भी की गई। अमनमणि पहले नौतनवा विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। इस तरह यदि दोनों पिता-पुत्र अपने घोषित क्षेत्रों से चुनाव लड़ते हैं, तो महाराजगंज जिले की दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर त्रिपाठी परिवार की राजनीतिक सक्रियता देखने को मिल सकती है।

    अमरमणि त्रिपाठी ने अपने संबोधन में युवाओं और देश की राजनीति को लेकर भी कई टिप्पणियां कीं। उन्होंने हाल के वर्षों में श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में युवाओं की राजनीतिक भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने भारत में भी युवाओं के दबाव से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उदाहरण दिया। उनके बयान को प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और युवाओं की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।

    हालांकि अमरमणि त्रिपाठी के लिए चुनाव लड़ने का रास्ता कानूनी रूप से सीधा नहीं है। उनकी चुनावी पात्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। Representation of the People Act की धारा 8(3) के तहत किसी अपराध में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा पाने वाला व्यक्ति दोषसिद्धि की तारीख से और जेल से रिहाई के बाद छह साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहता है। अमरमणि को मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा हुई थी और वह 2023 में जेल से बाहर आए। इसलिए 2027 के चुनाव के समय उनकी कानूनी पात्रता एक महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकती है।

    अमरमणि त्रिपाठी पहले भी उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। वह लक्ष्मीपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। परिसीमन के बाद इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में शामिल हो गया। 2007 में जेल में रहते हुए उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। बाद में मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में देहरादून की विशेष अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

    उनकी वापसी का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि महाराजगंज और आसपास के पूर्वांचली क्षेत्रों में स्थानीय राजनीति काफी प्रतिस्पर्धी मानी जाती है। फरेंदा और नौतनवा दोनों सीटों पर यदि त्रिपाठी परिवार सक्रिय रूप से चुनाव मैदान में उतरता है तो इससे स्थानीय राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमरमणि किस राजनीतिक दल के समर्थन या टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। उनके कार्यक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कोई राजनीतिक दल उन्हें औपचारिक रूप से अपना उम्मीदवार बनाएगा या वह किसी अन्य राजनीतिक मंच के माध्यम से चुनाव लड़ने की कोशिश करेंगे।

    अमरमणि त्रिपाठी की राजनीतिक वापसी की घोषणा ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। विभिन्न दल संगठनात्मक तैयारियों और संभावित उम्मीदवारों को लेकर रणनीति बना रहे हैं। ऐसे में पूर्वांचल के एक पुराने राजनीतिक चेहरे की सक्रियता आने वाले महीनों में चर्चा का विषय बनी रह सकती है।

    अमरमणि की ओर से फरेंदा से चुनाव लड़ने की घोषणा राजनीतिक इरादे के रूप में सामने आई है। चुनाव लड़ने की अंतिम स्थिति उनकी कानूनी पात्रता, किसी राजनीतिक दल से संभावित जुड़ाव और चुनाव कार्यक्रम के दौरान होने वाली औपचारिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी। उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी की नौतनवा से संभावित दावेदारी भी आने वाले समय में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

    अमरमणि त्रिपाठी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में फरेंदा सीट से उतरने का ऐलान कर प्रदेश की राजनीति में अपनी संभावित वापसी का संकेत दिया है। उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी के नौतनवा से चुनाव लड़ने की घोषणा ने इस वापसी को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि अमरमणि की चुनावी पात्रता को लेकर कानूनी सवाल मौजूद हैं और अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किस राजनीतिक दल का समर्थन मिलेगा। इसलिए 2027 के चुनाव तक उनकी राजनीतिक स्थिति और गतिविधियों पर नजर बनी रहेगी।

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