Last updated: July 7th, 2026 at 11:33 am

अयोध्या/लखनऊ: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार देते हुए कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। धार्मिक आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
हाल के दिनों में मंदिर में प्राप्त दान और उसके प्रबंधन को लेकर कुछ शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया। जांच एजेंसी मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड, दान राशि के उपयोग, विभिन्न खर्चों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों के वित्तीय लेन-देन और राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान हुए खर्चों से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में शामिल किए गए हैं।
अखिलेश यादव ने इस मामले को जनता की आस्था से जुड़ा बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि सरकार को अपनी जांच प्रक्रिया पर भरोसा है तो उसे किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के अधीन गठित जांच एजेंसी पर विपक्ष और आम जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की शंका की गुंजाइश न रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर धार्मिक विषयों का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल तथ्य सामने लाना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना है, न कि राजनीतिक विवाद पैदा करना।
इस पूरे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी अपना पक्ष रखा है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और सभी आवश्यक दस्तावेज जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ट्रस्ट का कहना है कि दान की राशि का उपयोग निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है तथा सभी वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित हैं। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी दानदाता को जानकारी चाहिए तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी चुनावों में भी प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्ष सरकार को पारदर्शिता के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि भाजपा इसे धार्मिक आस्था के नाम पर राजनीति करने का प्रयास बता रही है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
विशेष जांच दल अपनी जांच में जुटा हुआ है और विभिन्न दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस बीच सभी की नजर जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला न केवल उत्तर प्रदेश की राजनीति बल्कि करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की अनियमितता या दोष तय नहीं माना जा सकता और अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
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