Last updated: July 21st, 2026 at 03:58 pm

संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन राजधानी दिल्ली में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने हालिया छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की और बाद में राहुल गांधी समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई उचित नहीं थी। पार्टी ने सरकार से पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय करने और प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष और आम नागरिकों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। कांग्रेस नेता ने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विवाद के बजाय गंभीरता से संसद में उठाया जाना चाहिए।
प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों के पक्ष में आवाज उठाई। पार्टी नेताओं का कहना था कि विपक्ष लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा और संसद के भीतर तथा बाहर जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगा।
पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री आवास और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। बैरिकेडिंग के बावजूद जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित नियमों के तहत प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई।
इस घटनाक्रम का असर संसद की कार्यवाही पर भी देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने संसद में छात्र प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और NEET से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब की मांग की। विपक्ष का कहना था कि इन मुद्दों पर सदन में तत्काल चर्चा होनी चाहिए। लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हुई। सत्ता पक्ष ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की अपील की, जबकि विपक्ष अपने मुद्दों पर चर्चा की मांग पर कायम रहा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण सवालों से बचने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है और ऐसे मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। कांग्रेस ने यह भी कहा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
वहीं सरकार और पुलिस की ओर से कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन प्रधानमंत्री आवास जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और निर्धारित नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जाएगी।
राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं की हिरासत के बाद यह मामला संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह आने वाले दिनों में भी छात्र मुद्दों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखेगी। वहीं सरकार की ओर से विपक्ष से संसद में चर्चा के माध्यम से मुद्दे उठाने की अपील की जा रही है।
मानसून सत्र के दूसरे दिन राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं का प्रदर्शन केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का एक और उदाहरण बनकर सामने आया। प्रदर्शन, हिरासत और संसद में हंगामे के कारण छात्र मुद्दे और पुलिस कार्रवाई आज के राजनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में रहे। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर बहस और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और तेज होने की संभावना है।
![]()
Comments are off for this post.