Last updated: May 28th, 2026 at 01:45 pm

रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर संतुलित और कूटनीतिक रुख अपनाने का संकेत दिया है। विदेश मंत्रालय ने हालिया बयान में कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थन करता है। सरकार का मानना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार भारत दोनों क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। रूस-यूक्रेन युद्ध लंबे समय से वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, जबकि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहा है। ऐसे में भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति अपनाए हुए है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कह चुके हैं कि “यह युद्ध का युग नहीं है”। भारत लगातार संघर्ष समाप्त करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील करता रहा है। सरकार का कहना है कि वैश्विक शांति और स्थिरता सभी देशों के हित में है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर संतुलित रुख बनाए रखा है। भारत ने सीधे किसी पक्ष का समर्थन करने से बचते हुए मानवीय सहायता और बातचीत की जरूरत पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी विदेश नीति में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भी भारत विशेष रूप से सतर्क है। खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा लाखों भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं, इसलिए क्षेत्रीय अस्थिरता भारत के लिए आर्थिक और मानवीय दोनों स्तरों पर चिंता का विषय बन सकती है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की “मल्टी-अलाइनमेंट” रणनीति अब और स्पष्ट दिखाई दे रही है। भारत अमेरिका, रूस, यूरोपीय देशों और पश्चिम एशियाई देशों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। इसी रणनीति के तहत भारत वैश्विक विवादों में संतुलित और स्वतंत्र रुख अपनाता दिखाई देता है।
हालांकि विपक्षी दल समय-समय पर सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि भारत को वैश्विक मुद्दों पर अधिक स्पष्ट और प्रभावशाली भूमिका निभानी चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय हित और रणनीतिक संतुलन उसकी प्राथमिकता हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत की वैश्विक भूमिका लगातार बढ़ रही है। G20 की अध्यक्षता, QUAD में सक्रिय भागीदारी और विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर मजबूत उपस्थिति के कारण दुनिया भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में देख रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में भारत की विदेश नीति और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। ऐसे में भारत संतुलित कूटनीति और रणनीतिक साझेदारियों के जरिए अपनी वैश्विक स्थिति मजबूत करना चाहता है।
फिलहाल रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट को लेकर भारत शांति और संवाद की नीति पर कायम दिखाई दे रहा है। सरकार का फोकस राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता बनाए रखने पर बना हुआ है।
![]()
Comments are off for this post.