Last updated: July 10th, 2026 at 03:57 pm

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक में संघर्ष क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ रही यौन हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध बताया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि युद्ध, आतंकवाद और राजनीतिक दमन के दौरान महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा कि दुनिया के कई संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। आतंकवादी संगठन और सशस्त्र समूह कई बार यौन हिंसा का इस्तेमाल डर फैलाने, समुदायों को कमजोर करने और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए करते हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल निंदा पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी आवश्यक है।
भारत ने अपने संबोधन में इस बात पर भी जोर दिया कि पीड़ितों के पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कानूनी संरक्षण पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रतिनिधि ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की साझा जिम्मेदारी है। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों और सदस्य देशों को मिलकर ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना होगा।
भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी पुरानी और स्पष्ट नीति को दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। आतंकवादी संगठनों द्वारा महिलाओं के खिलाफ किए जाने वाले अपराधों को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए भारत ने कहा कि ऐसे संगठनों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। भारत ने सभी देशों से आतंकवाद के वित्तपोषण और समर्थन को रोकने के लिए भी मिलकर काम करने की अपील की।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह रुख उसकी लंबे समय से चली आ रही आतंकवाद विरोधी नीति के अनुरूप है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मांग उठाता रहा है कि आतंकवाद और उससे जुड़े अपराधों के खिलाफ दोहरे मानदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की सुरक्षा और मानवाधिकारों के मुद्दे पर भारत की सक्रिय भूमिका उसकी वैश्विक छवि को और मजबूत करती है।
महिला अधिकारों पर कार्य करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं बल्कि पूरे समाज पर गहरा प्रभाव डालने वाली त्रासदी होती है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के साथ-साथ उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास और सामाजिक सम्मान की बहाली भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और सदस्य देशों से इस दिशा में और प्रभावी कदम उठाने की अपील की।
भारत ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि वैश्विक शांति, सुरक्षा और मानव गरिमा की रक्षा तभी संभव है जब महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से मिलकर ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त अंतरराष्ट्रीय तंत्र विकसित करने का आग्रह किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में महिलाओं की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ भारत की यह स्पष्ट और दृढ़ नीति अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी भूमिका को और मजबूत करती है।
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