Last updated: July 9th, 2026 at 11:08 am

देश की सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा अवैध घुसपैठ, सीमा पार अपराध और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्रालय आज नई दिल्ली में सीमा से लगे जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। सम्मेलन में पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं वाले जिलों के पुलिस अधीक्षक, सीमा सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी तथा गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारी शामिल होंगे।
गृह मंत्रालय के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाना तथा केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। सम्मेलन में अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों के जरिए देश में रहने वाले विदेशी नागरिकों की पहचान, सीमा पार तस्करी, ड्रोन गतिविधियों, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। अधिकारियों का मानना है कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सीमा क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और बेहतर समन्वय की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।
बैठक में सीमा से लगे जिलों में जनसांख्यिकीय बदलाव और उसके संभावित सुरक्षा प्रभावों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। गृह मंत्रालय विभिन्न राज्यों से प्राप्त आंकड़ों और रिपोर्टों की समीक्षा करेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और स्थानीय पुलिस की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
सम्मेलन के दौरान राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत बनाने के लिए कई नए सुझावों पर भी विचार किया जाएगा। गृह मंत्रालय चाहता है कि सीमा से जुड़े मामलों में सूचना साझा करने की प्रक्रिया तेज हो और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत संयुक्त कार्रवाई की जा सके। इसके लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली, ड्रोन रोधी तकनीक और डिजिटल निगरानी तंत्र के बेहतर उपयोग पर भी चर्चा होगी।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने और सीमा पार अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए नई कार्ययोजना तैयार की जा सकती है। सीमा जिलों के पुलिस अधीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों की चुनौतियों और अनुभवों को भी सम्मेलन में साझा करेंगे, जिससे भविष्य की नीति निर्माण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में सीमा सुरक्षा केवल पारंपरिक घुसपैठ तक सीमित नहीं रह गई है। ड्रोन के माध्यम से हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी, साइबर नेटवर्क के जरिए अपराध और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध जैसे नए खतरे भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा तकनीकी संसाधनों का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
राजनीतिक दृष्टि से भी इस सम्मेलन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार लगातार सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बता रही है। गृह मंत्रालय का कहना है कि इस बैठक से प्राप्त सुझावों के आधार पर सीमा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए आगे आवश्यक प्रशासनिक और नीतिगत कदम उठाए जाएंगे। सम्मेलन के निष्कर्ष आने वाले समय में देश की सीमा सुरक्षा नीति को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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