Last updated: July 22nd, 2026 at 02:57 pm

साइबर अपराध के एक बड़े मामले में गुजरात साइबर क्राइम पुलिस ने उत्तर प्रदेश से जुड़े एक 18 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कथित तौर पर 121 फर्जी APK फाइलें और मोबाइल एप्लिकेशन तैयार करने का आरोप है, जिनका इस्तेमाल देशभर में करीब 65 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड को अंजाम देने के लिए किया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद साइबर अपराध के एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को धोखा देने और उनके बैंक खातों से पैसे निकालने के लिए किया जाता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार युवक ने कथित तौर पर बड़ी संख्या में फर्जी APK फाइलें तैयार की थीं। APK एंड्रॉयड मोबाइल एप्लिकेशन की इंस्टॉलेशन फाइल होती है। साइबर अपराधी कई बार इन फाइलों का इस्तेमाल लोगों के मोबाइल फोन में संदिग्ध या खतरनाक ऐप इंस्टॉल कराने के लिए करते हैं। इन ऐप के जरिए पीड़ितों की निजी जानकारी, बैंकिंग डिटेल और अन्य संवेदनशील डेटा तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा सकती है।
पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि कथित फर्जी एप्लिकेशन का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा था। आरोप है कि इन एप्लिकेशन के जरिए लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाया गया और उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क से जुड़े साइबर अपराधों में करीब 65 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की आशंका है। हालांकि पुलिस अभी पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरफ्तार आरोपी की भूमिका केवल फर्जी APK तैयार करने तक सीमित थी या वह साइबर फ्रॉड के पूरे नेटवर्क में भी सक्रिय रूप से शामिल था। पुलिस उसके मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। इन उपकरणों से प्राप्त डेटा के आधार पर कथित तौर पर तैयार किए गए फर्जी ऐप, उनके इस्तेमाल और उनसे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
साइबर क्राइम पुलिस इस मामले में बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित साइबर फ्रॉड से प्राप्त धन किन खातों में पहुंचा और इसे आगे किन माध्यमों से ट्रांसफर किया गया। इसके लिए संदिग्ध बैंक खातों और डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि वित्तीय लेन-देन की जांच से पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी APK के जरिए होने वाले साइबर अपराधों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। कई बार अपराधी लोगों को बैंक, सरकारी विभाग, नौकरी, निवेश या अन्य सेवाओं के नाम पर लिंक भेजते हैं और उनसे मोबाइल में APK इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं। ऐप इंस्टॉल होने के बाद अपराधी मोबाइल में मौजूद जानकारी का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान स्रोत से APK डाउनलोड करना बेहद जोखिमपूर्ण हो सकता है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे मोबाइल फोन में केवल आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक या APK फाइल को इंस्टॉल करने से बचें। बैंकिंग या वित्तीय जानकारी मांगने वाले संदिग्ध संदेशों पर प्रतिक्रिया न दें और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या संबंधित पुलिस विभाग को सूचना दें।
इस मामले में पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि 121 कथित फर्जी APK का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया। यदि इन एप्लिकेशन से जुड़े अन्य मामलों की पहचान होती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। पुलिस अलग-अलग राज्यों में सामने आए साइबर फ्रॉड मामलों से भी संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है।
गिरफ्तारी के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस मामले में सामने आए डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सकता है।
जांच का मुख्य फोकस कथित 121 फर्जी APK के स्रोत, उनके संचालन और 65 करोड़ रुपये के संभावित साइबर फ्रॉड से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला साइबर अपराध की दुनिया में तकनीकी विशेषज्ञता के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण बन सकता है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।
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