Last updated: July 2nd, 2026 at 03:00 pm

भारत सरकार ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की ओर से केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान जाएंगे और अंतिम संस्कार से जुड़े आधिकारिक कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह निर्णय भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सरकार का कहना है कि भारत और ईरान के संबंध केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और जन-जन के रिश्ते भी हैं। यही कारण है कि इस अवसर पर भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का फैसला किया है। प्रतिनिधिमंडल 3 जुलाई को ईरान के लिए रवाना होगा, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक विभिन्न शहरों में आयोजित किए जाएंगे।
अयातुल्ला अली ख़ामेनेई पिछले कई दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे और देश की विदेश नीति, सुरक्षा रणनीति तथा क्षेत्रीय राजनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके निधन के बाद ईरान में कई दिनों तक राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। अंतिम संस्कार में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों और नेताओं के शामिल होने की संभावना है, जिससे यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक आयोजन बन गया है।
भारत के इस निर्णय को पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत एक ओर ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर अन्य वैश्विक साझेदार देशों के साथ भी अपने संबंध मजबूत रखे हुए है। ऐसे में इस प्रकार का प्रतिनिधित्व भारत की संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है।
राजनीतिक और विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि ऐसे अवसर केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं होते, बल्कि देशों के बीच भविष्य के सहयोग और विश्वास को भी मजबूत करते हैं। भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह, क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार जैसे कई महत्वपूर्ण विषय हैं, जिन पर दोनों देश लगातार सहयोग करते रहे हैं।
इस बीच ईरान में अंतिम संस्कार को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने विभिन्न शहरों में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए हैं और समारोह के दौरान आवश्यक प्रतिबंध लागू करने की तैयारी की है। कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता बरत रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम दोनों देशों के बीच पारंपरिक मित्रता और कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भारत की यह भागीदारी उसकी सक्रिय और संतुलित विदेश नीति का संकेत भी मानी जा रही है।
भारत का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ईरान जाएगा और अंतिम संस्कार समारोह में देश का प्रतिनिधित्व करेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को लेकर आगे क्या नई पहल सामने आती है।
![]()
Comments are off for this post.