Last updated: July 3rd, 2026 at 08:04 am

वाराणसी में कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन की खरीद-फरोख्त कर लाखों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आरोपित पिता-पुत्र को अदालत से राहत नहीं मिली है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-4) सर्वजीत सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जग्गन पटेल और करन पटेल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मनोज साहनी ने लंका थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया है कि व्यापार के लिए भूमि खरीदने के दौरान उनकी मुलाकात संतोष साहनी के माध्यम से कथित कॉलोनाइजर बसंत लाल पटेल से कराई गई। आरोप है कि जमीन का सौदा सात लाख रुपये प्रति बिस्वा की दर से तय किया गया और विभिन्न किस्तों में उनसे करीब 44 लाख रुपये लिए गए।
शिकायत में कहा गया है कि 9 मई 2024 को वादी की माता पार्वती देवी के नाम जमीन का बैनामा कराया गया, जिसमें जग्गन पटेल, उनके पुत्र करन पटेल और बसंत लाल की भूमिका बताई गई है। बाद में जब खरीदी गई जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश की गई तो पता चला कि संबंधित भूमि पर किसी अन्य व्यक्ति का कब्जा था और वहां खेती की जा रही थी।
वादी का आरोप है कि आरोपितों ने कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर दूसरी भूमि दिखाकर धोखाधड़ी की और करीब 44 लाख रुपये हड़प लिए। मामले की सुनवाई के दौरान वादी की ओर से अधिवक्ता राकेश तिवारी, योगेंद्र सिंह प्रदीप और धर्मेंद्र तिवारी ने अदालत में अपना पक्ष रखा।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए दोनों आरोपितों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
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