Last updated: July 8th, 2026 at 04:37 am

International News: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह हाल के वर्षों में ईरान के खिलाफ सबसे व्यापक सैन्य अभियान माना जा रहा है। जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी नौसैनिक जहाजों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास मौजूद उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना था, जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक यह ऑपरेशन कई घंटों तक चला और पहले हुए हमलों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक था।
अमेरिका ने दी कड़ी चेतावनी
अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल जवाबी कार्रवाई नहीं बल्कि ईरान को सख्त संदेश देने के लिए उठाया गया कदम है। उनका कहना है कि यदि समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाया गया तो आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, हाल में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद यह अभियान शुरू किया गया।
ईरान ने किया जवाबी हमला
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी ओमान सागर में मौजूद अमेरिकी नौसैनिक जहाजों की ओर एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें और ड्रोन दागे। हालांकि इन हमलों से किसी नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी पक्ष ने भी अभी तक इस संबंध में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
कई इलाकों में धमाकों की खबर
ईरानी मीडिया के अनुसार, हमलों के बाद बंदर अब्बास, सीरिक और केश्म द्वीप सहित कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। कुछ बंदरगाहों पर आग लगने की भी सूचना सामने आई है। हालांकि ईरानी प्रशासन ने अब तक सैन्य नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।
तेल प्रतिबंध फिर लागू
सैन्य कार्रवाई के साथ अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार पर दोबारा प्रतिबंध लागू करने की घोषणा भी की है। वाशिंगटन का कहना है कि यह फैसला समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। वहीं तेहरान ने इसे दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।
युद्धविराम पर बढ़ा संकट
ताजा घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में लागू नाजुक युद्धविराम पर फिर से खतरा मंडराने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
![]()
Comments are off for this post.