Last updated: July 8th, 2026 at 12:29 pm

भारत और इंडोनेशिया ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोगी भी हैं। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाने, रक्षा उद्योग में साझेदारी विकसित करने तथा समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नियमित संवाद जारी रखने पर सहमति जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों की सामरिक क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिलेगी।
वार्ता में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को भी प्रमुखता दी गई। भारत और इंडोनेशिया दोनों हिंद महासागर और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के महत्व को देखते हुए नौवहन की स्वतंत्रता और सुरक्षित समुद्री परिवहन के पक्षधर हैं। दोनों देशों ने समुद्री डकैती, अवैध तस्करी, आतंकवाद और समुद्री अपराधों से मिलकर मुकाबला करने का संकल्प व्यक्त किया।
आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, बैटरी निर्माण, हरित ऊर्जा, डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्टार्टअप, फिनटेक और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और इंडोनेशिया के प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए दोनों देशों ने दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी विकसित करने की इच्छा व्यक्त की।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन और साइबर सुरक्षा भी बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहे। दोनों देशों ने नई तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग, साइबर खतरों से निपटने और डिजिटल नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पर्यटन के क्षेत्र में भी नई साझेदारियों पर विचार किया गया।
दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई को भी दोहराया। संयुक्त बयान में कहा गया कि किसी भी रूप में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ वैश्विक सहयोग आवश्यक है। दोनों देशों ने आतंकवादी वित्तपोषण, कट्टरपंथ और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने का समर्थन किया।
सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती देने पर सहमति बनी। भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं। इस दौरान दोनों देशों ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन को बढ़ावा देने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए कई नई पहलों पर चर्चा की। विशेषज्ञों का कहना है कि सांस्कृतिक सहयोग दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और इंडोनेशिया की क्षेत्रीय रणनीति के बीच बढ़ता तालमेल पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच दोनों देशों का सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षित समुद्री व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए ये समझौते केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका प्रभाव पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर पड़ सकता है। आने वाले समय में रक्षा, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि इस यात्रा के दौरान हुई सहमतियां भारत की विदेश नीति और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को नई गति देंगी।
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