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लखनऊ में पूर्व एआरटीओ के ठिकानों पर विजिलेंस का बड़ा छापा, करोड़ों की नकदी, सोना और संपत्ति के दस्तावेज बरामद

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत विजिलेंस विभाग ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते
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उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत विजिलेंस विभाग ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए परिवहन विभाग के एक पूर्व सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (ARTO) के लखनऊ स्थित आवास पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी और चल-अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार बरामद संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 35 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

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    विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज जांच के आधार पर की गई। तलाशी के दौरान करीब 1.62 करोड़ रुपये नकद, लगभग 13 किलोग्राम सोना, 9 किलोग्राम चांदी तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों की जांच के बाद संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, निवेश और आय के स्रोतों की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।

    जांच एजेंसियों ने बताया कि तलाशी अभियान कई घंटों तक चला। इस दौरान बैंक खातों, लॉकरों, अचल संपत्तियों, निवेश संबंधी रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों को भी कब्जे में लिया गया। अब आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    उत्तर प्रदेश सरकार लंबे समय से भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई का दावा करती रही है। हाल के वर्षों में कई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ किसी भी स्तर पर कार्रवाई करने में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस कार्रवाई को भी उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

    राजनीतिक स्तर पर भी इस कार्रवाई को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। सत्तापक्ष ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का उदाहरण बताया है। वहीं विपक्ष का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई निष्पक्ष और बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के होनी चाहिए। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और यदि अन्य लोगों की भी भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी समान कार्रवाई की जाए।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में केवल नकदी या कीमती सामान की बरामदगी ही पर्याप्त नहीं होती। जांच एजेंसियों को यह भी साबित करना होता है कि संबंधित संपत्ति वैध आय के स्रोतों से अर्जित नहीं की गई थी। इसी कारण बैंक रिकॉर्ड, आयकर विवरण, संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेज और अन्य वित्तीय साक्ष्य इस जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल विजिलेंस विभाग बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।

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