Last updated: July 9th, 2026 at 11:20 am

राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC-NET) के समाजशास्त्र (Sociology) प्रश्नपत्र को लेकर सामने आए विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है। कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र लीक हुआ था और इसके बदले लाखों रुपये की मांग की गई। इन आरोपों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर, एनटीए ने कहा है कि शिकायतों की जांच की जा रही है और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कई अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर दावा किया कि समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र में कई प्रश्न पहले से प्रसारित किए गए थे। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र में वर्तनी और भाषा संबंधी कई त्रुटियां थीं, जिससे उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ा। इन दावों के बाद छात्रों ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे युवाओं का भरोसा प्रभावित हो रहा है। विपक्ष का कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
उधर, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने स्पष्ट किया है कि उसे प्राप्त शिकायतों की समीक्षा की जा रही है। एजेंसी ने कहा कि परीक्षा की सुरक्षा के लिए निर्धारित सभी प्रोटोकॉल लागू किए गए थे और यदि किसी अभ्यर्थी के पास ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल रिकॉर्ड, परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है ताकि तथ्यों का पता लगाया जा सके।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। लाखों छात्र वर्षों की तैयारी के बाद इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता का प्रभाव सीधे उनके भविष्य पर पड़ता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक डिजिटल निगरानी, एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र प्रणाली और मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों को लागू किया जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे हमेशा राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहे हैं। ऐसे मामलों में सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों पर निष्पक्ष जांच कराने का दबाव बढ़ जाता है। उनका मानना है कि यदि जांच समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरी होती है तो छात्रों का भरोसा बहाल करने में मदद मिलेगी। वहीं यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई आवश्यक होगी।
जांच प्रक्रिया जारी है और एनटीए ने अभ्यर्थियों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। केंद्र सरकार ने भी संकेत दिया है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और एजेंसियों की कार्रवाई पर छात्रों, शिक्षाविदों और राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी।
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