Last updated: July 10th, 2026 at 04:09 pm

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत का पक्ष मजबूती से रखते हुए आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। भारत ने बैठक में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट कार्रवाई की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।
बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने आसियान देशों के अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय मुलाकातें भी कीं। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रक्षा सहयोग, कनेक्टिविटी और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और इंडो-पैसिफिक विजन में आसियान की केंद्रीय भूमिका है तथा भारत इस साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अपने संबोधन में जयशंकर ने समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा वैश्विक व्यापार और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी देशों से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) सहित अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करने की अपील की। भारत ने स्पष्ट किया कि समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप होना चाहिए।
आतंकवाद के मुद्दे पर विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी रूप में आतंकवाद को समर्थन या संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और कट्टरपंथ के खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया। भारत ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी प्रकार का दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता और सभी देशों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।
बैठक में आर्थिक सहयोग भी प्रमुख एजेंडा रहा। भारत ने डिजिटल व्यापार, हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में आसियान देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और आसियान के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दोनों पक्षों ने मुक्त, सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर भी सहमति जताई।
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आसियान भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। भारत लगातार दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति भी और मजबूत होगी।
बैठक के अंत में जयशंकर ने कहा कि भारत आने वाले समय में भी आसियान देशों के साथ अपने व्यापक रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि साझा प्रयासों के माध्यम से क्षेत्रीय शांति, आर्थिक विकास और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में भारत की सक्रिय भागीदारी क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को और मजबूत करती है।
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