Last updated: July 11th, 2026 at 11:39 am

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा उम्मीदवार बदलने के फैसले के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से ठीक पहले प्रत्याशी बदलना इस बात का संकेत है कि भाजपा राजनीतिक दबाव में है और उसे अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा है। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उम्मीदवार परिवर्तन पूरी तरह संगठनात्मक और व्यक्तिगत कारणों से किया गया है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की रणनीति शुरुआत से ही कमजोर दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, जिस उम्मीदवार को पार्टी ने पहले मैदान में उतारा था, उसके नामांकन वापस लेने के बाद अचानक नया उम्मीदवार घोषित करना बताता है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता ऐसे घटनाक्रमों को गंभीरता से देख रही है और इसका असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है।
भाजपा ने प्रशांत किशोर के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने पारिवारिक कारणों से अपनी उम्मीदवारी वापस ली थी। इसके बाद पार्टी ने तत्काल संगठन से जुड़े नेता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार घोषित किया। भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और उम्मीदवार बदलने से चुनावी तैयारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से नए उम्मीदवार के समर्थन में पूरी ताकत से प्रचार करने की अपील की।
बांकीपुर विधानसभा सीट को बिहार की प्रतिष्ठित सीटों में माना जाता है। इस उपचुनाव पर राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर है। जन सुराज पार्टी इसे अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का महत्वपूर्ण अवसर मान रही है, जबकि भाजपा इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और अन्य विपक्षी दल भी चुनावी समीकरणों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार बदलना हमेशा चर्चा का विषय बन जाता है। हालांकि किसी भी दल के लिए परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलना असामान्य नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के मनोबल पर भी असर डाल सकता है।
बिहार में इस समय सभी प्रमुख दल चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं। भाजपा और एनडीए अपने संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि जन सुराज पार्टी राज्यभर में अपने जनाधार को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। प्रशांत किशोर लगातार जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं और पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प देने का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा अपने विकास कार्यों और संगठनात्मक मजबूती को चुनावी मुद्दा बना रही है।
फिलहाल बांकीपुर उपचुनाव बिहार की सबसे चर्चित राजनीतिक घटनाओं में शामिल हो गया है। भाजपा के उम्मीदवार बदलने और उस पर प्रशांत किशोर की प्रतिक्रिया ने चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मतदान तक दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है। अब सभी की नजर चुनाव प्रचार, मतदाताओं की प्रतिक्रिया और आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई है।
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