Last updated: July 11th, 2026 at 11:41 am

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान भारत के नक्शे को गलत तरीके से प्रदर्शित किए जाने पर भारतीय राजनयिक ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारतीय उच्चायोग में सेकेंड सेक्रेटरी पूजा कुमारी झा ने कार्यक्रम के दौरान तत्काल आपत्ति जताते हुए स्पष्ट कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा भारत की सीमाओं को गलत तरीके से दिखाना तथ्यात्मक रूप से गलत है। यह घटना भारत-बांग्लादेश संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति के संदर्भ में चर्चा का विषय बन गई है।
यह घटना ढाका स्थित बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (BIISS) में आयोजित एक सेमिनार के दौरान हुई। कार्यक्रम का विषय दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग (SAARC) को पुनर्जीवित करने से जुड़ा था। सेमिनार में पूर्व बांग्लादेशी उच्चायुक्त अहमद तारिक करीम प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान प्रस्तुति में प्रदर्शित एक नक्शे में जम्मू-कश्मीर को भारत की आधिकारिक सीमा के अनुरूप नहीं दिखाया गया। जैसे ही यह नक्शा स्क्रीन पर आया, भारतीय राजनयिक पूजा कुमारी झा ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई।
पूजा कुमारी झा ने कहा कि प्रदर्शित नक्शा गलत है और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न तथा अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने आयोजकों से इस तथ्य को रिकॉर्ड में दर्ज करने का आग्रह किया। उनकी आपत्ति के बाद कार्यक्रम में कुछ समय के लिए चर्चा रुक गई। इसके बाद प्रस्तुति देने वाले अहमद तारिक करीम ने कहा कि नक्शा केवल प्रस्तुतीकरण के उद्देश्य से उपयोग किया गया था और इसका उद्देश्य वास्तविक अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को दर्शाना नहीं था। इसके बावजूद भारतीय अधिकारी ने दोहराया कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की गलत प्रस्तुति स्वीकार्य नहीं है।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने भारतीय राजनयिक की तत्परता और स्पष्ट रुख की सराहना की। विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने आधिकारिक नक्शे और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर स्पष्ट और सुसंगत नीति अपनाता रहा है। जब भी किसी मंच पर भारत की सीमाओं को गलत तरीके से प्रदर्शित किया जाता है, भारतीय प्रतिनिधि तुरंत अपनी आपत्ति दर्ज कराते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के संबंध हाल के वर्षों में व्यापार, सुरक्षा, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाओं को दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों से अलग रखते हुए तथ्यात्मक स्तर पर सुलझाया जाता है। उनका कहना है कि कूटनीतिक मंचों पर देशों की आधिकारिक सीमाओं का सही चित्रण करना अंतरराष्ट्रीय शिष्टाचार और नियमों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
भारत सरकार की ओर से कई अवसरों पर यह स्पष्ट किया गया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस विषय पर उसका रुख नहीं बदला है। यही कारण है कि विदेशों में आयोजित कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और प्रकाशनों में यदि भारत का नक्शा गलत दिखाया जाता है, तो भारतीय अधिकारी तत्काल आपत्ति दर्ज कराते हैं। यह घटना भी उसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है।
यह मामला कूटनीतिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि सेमिनार के आयोजकों की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि नक्शा केवल प्रस्तुतीकरण के उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया था, लेकिन भारत ने एक बार फिर अपने आधिकारिक रुख को स्पष्ट करते हुए यह संदेश दिया है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की त्रुटि या गलत प्रस्तुति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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