Last updated: July 14th, 2026 at 12:47 pm

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि वह इस आदेश में हस्तक्षेप नहीं करेगी। हालांकि, अदालत ने हाई कोर्ट से लंबित अपीलों की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया है।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हाई कोर्ट में लंबित अपीलों का जल्द निपटारा किया जाना चाहिए और यदि संभव हो तो छह महीने के भीतर इस पर फैसला किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह हाई कोर्ट के जमानत आदेश में दखल देने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़े कानूनी प्रश्नों को भविष्य के लिए खुला रखा गया है।
सीबीआई ने उठाए थे ये सवाल
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने सजा की अवधि की गणना में त्रुटि की थी। उनका कहना था कि लालू यादव ने सजा का 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा नहीं किया था, फिर भी इसी आधार पर उन्हें जमानत दे दी गई। सीबीआई ने यह भी तर्क दिया कि सजा की गणना करते समय विभिन्न मामलों की सजा को एक साथ मान लिया गया, जो कानूनी रूप से उचित नहीं था।
लालू यादव की ओर से क्या दलील दी गई?
लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि जमानत देना न्यायालय के विवेकाधिकार का विषय है। उन्होंने दलील दी कि हाई कोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अपना निर्णय दिया था।
गौरतलब है कि झारखंड हाई कोर्ट ने वर्ष 2019 में लालू यादव को चारा घोटाला मामले में जमानत दी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, लेकिन अब शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सीबीआई की अपील स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
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