Last updated: July 14th, 2026 at 12:50 pm

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर चल रहे धार्मिक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी पक्षों से संतुलित रुख अपनाने की बात कही और अंतरिम व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उन याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना गया था।
नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान पर विचार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों समुदायों के अधिकारों का सम्मान करते हुए नमाज के लिए परिसर के आसपास उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है। अदालत ने अंतरिम व्यवस्था के तहत शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज के लिए परिसर के निकट एक अलग खुली जगह उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।
ASI को संरचनात्मक बदलाव से रोका
शीर्ष अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक बिना सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के विवादित परिसर में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाए।
संवेदनशील मामलों में भाषा पर बरतें सावधानी
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और अदालत में इस्तेमाल किए जाने वाले प्रत्येक शब्द का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सभी पक्षों को अपनी दलीलें रखते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का अनावश्यक विवाद या भ्रम पैदा न हो।
1997 की व्यवस्था का भी हुआ जिक्र
मुस्लिम पक्ष ने अदालत के सामने वर्ष 1997 की उस व्यवस्था का उल्लेख किया, जिसके तहत शुक्रवार को नमाज और बसंत पंचमी सहित निर्धारित अवसरों पर हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी जाती थी। पक्षकारों ने इसे लंबे समय तक लागू रहने वाली व्यवस्था बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल उसका उद्देश्य किसी पक्ष के अधिकारों को प्रभावित किए बिना शांतिपूर्ण अंतरिम व्यवस्था सुनिश्चित करना है। अदालत ने संकेत दिया कि मामले की विस्तृत सुनवाई जल्द किसी उपयुक्त पीठ के समक्ष की जाएगी।
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