Last updated: July 14th, 2026 at 02:20 pm

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को उस समय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं, जब कई जिला अदालतों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) से जुड़े कुछ शैक्षणिक संस्थानों को बम धमकी वाले ईमेल प्राप्त हुए। धमकी मिलने की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad), डॉग स्क्वाड, फायर सर्विस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया। कई घंटों तक चली जांच के बाद किसी भी परिसर से कोई विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई और शुरुआती जांच में धमकियों को फर्जी पाया गया। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी रखे हुए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, धमकी भरे ईमेल मिलने के बाद सबसे पहले संबंधित परिसरों की सुरक्षा बढ़ाई गई और एहतियात के तौर पर कुछ क्षेत्रों को खाली कराया गया। अदालत परिसरों में मौजूद वकीलों, कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। इसके बाद बम निरोधक दस्तों और खोजी कुत्तों की सहायता से भवनों, पार्किंग क्षेत्रों, प्रवेश द्वारों और अन्य संवेदनशील स्थानों की बारीकी से जांच की गई।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार की धमकियों को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाता। भले ही बाद में वे फर्जी साबित हों, लेकिन सुरक्षा मानकों के अनुसार प्रत्येक सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। इसी कारण विभिन्न एजेंसियों को तुरंत सक्रिय किया गया और व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जांच एजेंसियों ने धमकी वाले ईमेल की तकनीकी जांच भी शुरू कर दी है। साइबर विशेषज्ञ ईमेल के स्रोत, आईपी एड्रेस, सर्वर लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ईमेल किसने भेजे, उनका उद्देश्य क्या था और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है। यदि आरोपी की पहचान हो जाती है तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में स्कूलों, अस्पतालों, हवाई अड्डों, सरकारी कार्यालयों और न्यायालय परिसरों को इस प्रकार के फर्जी धमकी भरे ईमेल मिलने की घटनाएं सामने आई हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर दहशत फैलाने या प्रशासनिक तंत्र को परेशान करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि आधुनिक साइबर फॉरेंसिक तकनीकों की मदद से ऐसे संदेश भेजने वालों तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।
घटना के बाद अदालतों और संबंधित संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने सीसीटीवी निगरानी, प्रवेश नियंत्रण और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा सुरक्षा कर्मियों को भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने के लिए कहा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर आधारित धमकियों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में केवल भौतिक सुरक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि साइबर सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत करना आवश्यक है। सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों को नियमित साइबर ऑडिट, ईमेल सुरक्षा प्रणाली और डिजिटल निगरानी को प्राथमिकता देनी चाहिए।
दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। साथ ही यदि किसी को कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। जांच एजेंसियों का कहना है कि धमकी देने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
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