Last updated: July 21st, 2026 at 03:15 pm

बिहार विधानसभा ने मंगलवार को बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। नए कानून का उद्देश्य पारंपरिक जुए के साथ-साथ ऑनलाइन, मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित हो रहे जुए पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
सदन में विधेयक पेश करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि राज्य में अब तक 1867 के बंगाल जुआ अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती थी, लेकिन बदलती तकनीक और डिजिटल माध्यमों के विस्तार के कारण यह कानून वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गया था। इसी वजह से आधुनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नया कानून लाया गया है।
सरकार के अनुसार, नए कानून के दायरे में केवल जुआ खेलने वाले ही नहीं, बल्कि जुआ संचालित करने वाले, आर्थिक सहायता देने वाले और इस गतिविधि से कमीशन या लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्ति एवं संस्थाएं भी शामिल होंगी। ऐसे मामलों में कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों ने इसके प्रावधानों पर सवाल उठाए और सरकार से विस्तृत समीक्षा की मांग की। जवाब में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जुआ संबंधी कानून बनाना राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए नया कानून लाना आवश्यक था।
उन्होंने यह भी बताया कि विधेयक में पहली बार अपराध करने वालों और बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए अलग-अलग दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे संगठित और आदतन जुआ गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि डिजिटल माध्यमों से बड़े पैमाने पर आर्थिक लेनदेन होने के कारण जुए का दायरा तेजी से बढ़ा है। ऐसे में नया कानून समाज को इस बुराई से बचाने और आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
सदन में चर्चा पूरी होने के बाद बिहार जुआ प्रतिषेध विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। अब राज्य में ऑनलाइन, मोबाइल और अन्य डिजिटल माध्यमों से संचालित जुए के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता और मजबूत हो जाएगा।
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