Last updated: July 22nd, 2026 at 08:44 am

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन राज्य में बड़ी संख्या में राशन कार्ड रद्द किए जाने का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान विपक्ष ने सरकार से सवाल किया कि यदि लाभार्थी पात्र नहीं थे तो उनके राशन कार्ड पहले क्यों बनाए गए और अब लाखों परिवारों के नाम सूची से क्यों हटाए जा रहे हैं।
सीपीआईएम विधायक अजय कुमार ने सदन में कहा कि केंद्र सरकार से प्राप्त संदिग्ध आंकड़ों के आधार पर राज्य में करीब 35.36 लाख राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से भी जानकारी दी जा चुकी है।
विपक्ष का आरोप है कि राशन कार्ड बनाते समय पात्रता की शर्तों का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया, जबकि अब मामूली कारणों या तकनीकी आधार पर बड़ी संख्या में कार्ड रद्द किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में कठिनाई हो रही है।
सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, बिहार में इस समय लगभग 1.87 करोड़ राशन कार्ड और करीब 8.20 करोड़ लाभार्थी दर्ज हैं। विपक्ष ने दावा किया कि कई जिलों में बड़ी संख्या में कार्ड रद्द किए गए हैं, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं।
अजय कुमार ने कहा कि राशन कार्ड निरस्त होने का असर केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली तक सीमित नहीं रहेगा। इससे कई परिवार आयुष्मान भारत, पेंशन, श्रम कार्ड, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से पात्र लाभार्थियों के हितों की रक्षा करने और पूरी प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा कराने की मांग की।
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