Last updated: July 25th, 2026 at 11:57 am

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया साझा की है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र और युवाओं की एकजुटता की जीत बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक पड़ाव है, जबकि असली लक्ष्य अब शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और व्यापक सुधार लाना है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने संदेश में वांगचुक ने देशभर के युवाओं और नागरिकों के संघर्ष की सराहना की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन, धैर्य और दृढ़ संकल्प ने यह साबित किया है कि लोकतांत्रिक तरीके से भी बदलाव संभव है।
वांगचुक ने अपने संदेश में देश की नई पीढ़ी और आंदोलन में शामिल सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों से उठी आवाज़ों ने यह दिखाया कि जब नागरिक बिना डर के अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो उनकी बात को नजरअंदाज करना आसान नहीं होता।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटनाक्रम को संघर्ष का अंत नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार लागू करने की है। उन्होंने अपने संदेश का समापन इस बात के साथ किया कि अब आंदोलन का अगला चरण सुधारों पर केंद्रित होना चाहिए।
गौरतलब है कि इससे पहले सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक अनशन किया था। बाद में केंद्र सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने अपना उपवास समाप्त किया। सरकार ने भरोसा दिलाया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनम वांगचुक का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं की भागीदारी पर जारी बहस के बीच एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
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