Last updated: July 25th, 2026 at 12:04 pm

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम को युवाओं की बड़ी जीत बताते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि यह केवल किसी एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि देश के युवाओं की आवाज़ की ताकत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक पूरे सिस्टम की गंभीर समीक्षा करनी चाहिए, ताकि भविष्य में परीक्षा संबंधी विवाद और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में इंटरनेट, सोशल मीडिया और सड़कों पर उतरकर युवाओं ने अपनी बात मजबूती से रखी, जिसके चलते सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ा। उनके मुताबिक, यह लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी और जागरूकता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस पूरे घटनाक्रम से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के नए अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
सोशल मीडिया पर भी अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए एक पोस्ट में लिखा, ये इस्तीफा नहीं, इंकलाब है! यह पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।
इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस्तीफे के बाद सरकार को छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज की जांच, युवाओं से माफी और आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देशभर में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।
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