Last updated: July 25th, 2026 at 03:10 pm

नोएडा के सेक्टर-94 स्थित Supertech Supernova प्रोजेक्ट के होमबायर्स के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सशक्त समिति ने नोएडा प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि पात्र होमबायर्स की लीज डीड दर्ज करने की प्रक्रिया को पुराने डेवलपर की बकाया देनदारियों से अलग रखा जाए। इसका मतलब यह है कि जिन खरीदारों ने अपने फ्लैट की निर्धारित राशि का भुगतान कर दिया है, उनकी संपत्ति के दस्तावेजों की रजिस्ट्री केवल इस वजह से नहीं रोकी जानी चाहिए कि डेवलपर Supertech Realtors Private Limited की ओर से नोएडा प्राधिकरण या वित्तीय संस्थानों के कुछ पुराने बकाये लंबित हैं।
यह मामला उन हजारों खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने Supernova प्रोजेक्ट में अपनी जीवनभर की बचत लगाई है। परियोजना के डेवलपर Supertech Realtors के दिवालिया प्रक्रिया में जाने के बाद कई खरीदारों के सामने अपने घर की रजिस्ट्री और परियोजना को पूरा कराने की चुनौती खड़ी हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में होमबायर्स के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक विशेष समिति का गठन किया है, जो परियोजना के संचालन और उसके पूरा होने की प्रक्रिया की निगरानी कर रही है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, Supernova प्रोजेक्ट में 2,863 आवासीय इकाइयां बेची जा चुकी हैं, जिनमें से 1,121 इकाइयों का कब्जा खरीदारों को दिया जा चुका है। अब समिति का प्रयास है कि जिन खरीदारों ने अपनी ओर से भुगतान की आवश्यक शर्तें पूरी कर दी हैं, उन्हें संपत्ति के कानूनी दस्तावेज हासिल करने में अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। समिति का ताजा निर्देश इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस मामले की सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि डेवलपर की वित्तीय स्थिति और बकाया देनदारियों का असर उन खरीदारों पर भी पड़ रहा था, जिन्होंने अपनी ओर से फ्लैट की कीमत का भुगतान पूरा कर दिया था। ऐसे खरीदारों का तर्क रहा है कि उन्होंने डेवलपर के साथ अपना वित्तीय दायित्व पूरा कर दिया है, इसलिए कंपनी के पुराने कर्ज या विवादों के कारण उनकी संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं रोकी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति का रुख भी इसी दिशा में दिखाई दे रहा है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने Supertech Realtors और उसकी मूल कंपनी के खातों के फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया था और परियोजना को पूरा कराने के लिए एक तीन सदस्यीय समिति की निगरानी व्यवस्था स्थापित की थी। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि परियोजना से जुड़े वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल निर्माण कार्य को पूरा करने में किया जाए और खरीदारों के हितों की अनदेखी न हो।
Supernova परियोजना नोएडा के प्रमुख रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसमें आवासीय इकाइयों के साथ-साथ व्यावसायिक और अन्य मिश्रित उपयोग वाली सुविधाएं भी शामिल हैं। परियोजना के लंबे समय तक प्रभावित रहने से खरीदारों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कई लोगों ने बैंक लोन, किराए और अन्य वित्तीय दायित्वों के बीच वर्षों तक अपने घर का इंतजार किया है।
नए निर्देश से उन खरीदारों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका भुगतान पूरा हो चुका है और जिनकी लीज डीड केवल डेवलपर की बकाया देनदारियों के कारण अटकी हुई है। हालांकि, प्रत्येक मामले में पात्रता और दस्तावेजों की जांच संबंधित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। खरीदारों को आवश्यक दस्तावेज और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले का व्यापक महत्व भी है। रियल एस्टेट परियोजनाओं में डेवलपर की वित्तीय समस्याओं का सीधा असर अक्सर उन खरीदारों पर पड़ता है, जिन्होंने अपनी ओर से भुगतान पूरा कर दिया होता है। ऐसे मामलों में खरीदारों के अधिकारों को डेवलपर की देनदारियों से अलग रखना उन्हें लंबे समय तक चलने वाली कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों से बचा सकता है।
हालांकि, Supernova परियोजना से जुड़े सभी विवाद अभी समाप्त नहीं हुए हैं। परियोजना को पूरी तरह पूरा करने, लंबित निर्माण कार्यों को गति देने और सभी खरीदारों को समय पर कब्जा दिलाने की चुनौती अभी भी बनी हुई है। समिति को परियोजना की वित्तीय और निर्माण संबंधी स्थिति पर लगातार निगरानी रखनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट की समिति का यह निर्देश Supernova के उन होमबायर्स के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है, जिन्होंने अपने फ्लैट का भुगतान पूरा कर दिया है। अब नोएडा प्राधिकरण को लीज डीड दर्ज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा और डेवलपर की पुरानी देनदारियों को खरीदारों के अधिकारों में बाधा नहीं बनने देना होगा। आने वाले समय में इस कदम से अन्य लंबित मामलों के समाधान का रास्ता भी खुल सकता है और नोएडा में अटकी रियल एस्टेट परियोजनाओं के खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकती है।
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