Last updated: July 26th, 2026 at 02:14 pm

बिहार की राजनीति में NEET पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव को बिहार बंद से जुड़े एक मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई है। तेज प्रताप यादव ने NEET पेपर लीक के विरोध में आयोजित बिहार बंद का समर्थन किया था। इसके बाद उनके खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है।
NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच लंबे समय से नाराजगी देखने को मिल रही है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं और परीक्षा से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर बिहार में भी छात्रों और राजनीतिक दलों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए।
तेज प्रताप यादव ने NEET पेपर लीक के आरोपों के विरोध में आयोजित बिहार बंद को अपना समर्थन दिया था। बंद के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं। इसके बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से दर्ज मामले में तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार किया गया और बाद में अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
तेज प्रताप यादव की हिरासत की खबर सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। उनके समर्थकों और विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि NEET जैसे गंभीर मुद्दे पर छात्रों के समर्थन में आवाज उठाने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय सरकार को परीक्षा व्यवस्था से जुड़े आरोपों की जांच पर ध्यान देना चाहिए।
दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह के नियम उल्लंघन को लेकर कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। प्रशासन का पक्ष है कि किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून का पालन करना जरूरी है और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों में पाई जाती है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
NEET पेपर लीक का मुद्दा बिहार में पहले भी राजनीतिक विवाद का कारण बन चुका है। विपक्षी दल लगातार सरकार से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती है।
तेज प्रताप यादव की न्यायिक हिरासत के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल कर सकता है। उनके समर्थकों का कहना है कि वह छात्रों की समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे थे और उनके खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है। हालांकि, इस तरह के आरोपों पर अंतिम स्थिति कानूनी प्रक्रिया और अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की संख्या काफी अधिक है। राज्य के हजारों युवा NEET, UPSC, SSC, रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है।
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो NEET पेपर लीक का मुद्दा आने वाले समय में बिहार की राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विपक्षी दल सरकार पर दबाव बनाने के लिए इसे प्रमुख मुद्दे के रूप में उठा सकते हैं। वहीं, सरकार की ओर से परीक्षा से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को अपनी प्राथमिकता बताया जा सकता है।
तेज प्रताप यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद बिहार में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और अदालत की कार्यवाही पर सभी की नजर बनी हुई है। साथ ही, NEET परीक्षा से जुड़े विवादों के समाधान और छात्रों की मांगों को लेकर सरकार की अगली कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी। आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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