Last updated: July 31st, 2026 at 01:06 pm

पटना: बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने संसद परिसर में विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सनातन संस्कृति से जुड़े प्रतीकों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का उपहास करना करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाने जैसा है।
डॉ. सुमन ने कहा कि पहले फिल्मों और मनोरंजन के माध्यमों में सनातन परंपराओं, साधु-संतों, तिलक, चोटी और धार्मिक प्रतीकों को मजाक का विषय बनाया जाता था। अब वही प्रवृत्ति राजनीति में भी दिखाई देने लगी है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करना और सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन धार्मिक प्रतीकों को राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा बनाना उचित नहीं माना जा सकता। संसद जैसी सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था की गरिमा बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है।
विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए मंत्री ने कहा कि राजनीतिक लड़ाई नीतियों और मुद्दों पर लड़ी जानी चाहिए। सरकार की आलोचना करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन किसी धर्म, परंपरा या आस्था का मजाक उड़ाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि देश की करोड़ों जनता की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना सभी राजनीतिक दलों का दायित्व है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन इसे मर्यादा और संवेदनशीलता के साथ व्यक्त किया जाना चाहिए।
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