Last updated: August 1st, 2026 at 01:17 pm

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतकों की पहचान शक्ति जिले के दीपक रात्रे और सारंगढ़-बिलाईगढ़ के भूपेंद्र भाइना के रूप में हुई है।
परिजनों का आरोप है कि हमलावरों ने गोली चलाने से पहले मजदूरों से उनकी पहचान, जाति और धर्म के बारे में पूछा था। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। घटना की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की तलाश में जुटी हैं।
बताया जा रहा है कि दोनों मजदूर कुलगाम के एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे और रोजगार की तलाश में कुछ महीने पहले कश्मीर पहुंचे थे। दीपक रात्रे अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, जबकि भूपेंद्र भाइना भी बेहतर रोजगार की उम्मीद में जम्मू-कश्मीर आए थे।
घटना की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई नेताओं ने कड़ी निंदा की है। खरगे ने कहा कि यदि पहचान के आधार पर हमला किया गया है तो यह आतंकवाद की क्रूर मानसिकता का उदाहरण है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दोनों मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों को शवों को उनके गृह राज्य लाने और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां हमले के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी।
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