Last updated: August 7th, 2026 at 08:03 am

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी यानी Gen Z और Gen Alpha को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि आज के युवा उनकी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार, जागरूक और देशभक्त हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी हर विषय पर सवाल पूछती है और उसे तर्कसंगत जवाब तथा खुला संवाद चाहिए।
मुंबई में आयोजित India International Movement to United Nations (IIMUN) कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलेगा, तो आंदोलन जैसी परिस्थितियां पैदा होना स्वाभाविक है।
लोकतंत्र में संवाद सबसे जरूरी
RSS प्रमुख ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती संवाद और विचार-विमर्श पर निर्भर करती है। विरोध का उद्देश्य समाज में टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि समाधान और आम सहमति तक पहुंचना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज दोनों को युवाओं की बात गंभीरता से सुननी चाहिए।
मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि Gen Z को राष्ट्रविरोधी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह पीढ़ी देश का भविष्य है और उनकी चिंताओं को समझना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को सम्मान देना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।
आज की पीढ़ी तर्क चाहती है
भागवत ने अपनी पीढ़ी और आज की पीढ़ी की तुलना करते हुए कहा कि पहले लोग बड़ों की बात बिना सवाल किए स्वीकार कर लेते थे, लेकिन आज के युवा हर बात का कारण जानना चाहते हैं। उन्होंने इसे सकारात्मक बदलाव बताते हुए कहा कि स्वस्थ बहस और तार्किक चर्चा लोकतंत्र की मूल भावना है।
व्यवस्था सुधार के लिए हो आंदोलन
उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार होना चाहिए, न कि केवल विरोध करना। संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से रखने का अधिकार है और समाज को भी उनकी बात सुननी चाहिए।
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