Last updated: August 7th, 2026 at 04:31 pm

हाल ही में शुरू किए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क के एक बड़े हिस्से के धंसने के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। करीब 300 मीटर लंबे हिस्से में सड़क के धंसने और स्लिपेज की समस्या सामने आई है। घटना के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित निर्माण कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्से में सड़क की सतह और किनारे के हिस्सों में नुकसान दिखाई दिया। इसके बाद NHAI ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कराया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सड़क धंसने के पीछे निर्माण सामग्री, मिट्टी की गुणवत्ता, जल निकासी या निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी कोई तकनीकी समस्या तो नहीं रही।
सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई के तौर पर प्रभावित हिस्से की मरम्मत पूरी होने तक वहां टोल वसूली रोक दी गई है। NHAI ने स्पष्ट किया है कि सड़क को सुरक्षित और यातायात के लिए उपयुक्त बनाए जाने के बाद ही टोल व्यवस्था सामान्य की जाएगी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को दोनों शहरों के बीच तेज और सुगम कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना माना जाता है। इसके शुरू होने से पुराने मार्ग पर यातायात का दबाव कम होने और दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटने की उम्मीद जताई गई थी। ऐसे में उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क के हिस्से में आई समस्या ने परियोजना की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में निर्माण कंपनी PNC Infratech की भूमिका भी जांच के दायरे में है। NHAI ने कंपनी के खिलाफ भविष्य की राजमार्ग परियोजनाओं में बोली लगाने पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है।
स्थानीय रिपोर्टों में यह भी सवाल उठाया गया है कि सड़क के निर्माण के दौरान मिट्टी और गिट्टी के पटान तथा सड़क के किनारे बने शोल्डर के निर्माण में निर्धारित मानकों का पर्याप्त पालन हुआ या नहीं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार प्रभावित हिस्से में शोल्डर भी धंस गए हैं।
NHAI की ओर से अब प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी नए एक्सप्रेसवे पर इतनी जल्दी सड़क धंसने की घटना को सामान्य रखरखाव की समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता। निर्माण सामग्री, कॉम्पैक्शन, जल निकासी व्यवस्था और जमीन की मजबूती जैसे सभी पहलुओं की विस्तृत जांच आवश्यक है।
इस घटना ने सड़क निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही को लेकर भी बहस तेज कर दी है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार होने वाली ऐसी परियोजनाओं में निर्माण के हर चरण की तकनीकी निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि जांच में निर्माण मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
NHAI प्रभावित हिस्से की निगरानी कर रहा है और मरम्मत का काम प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की यह घटना उत्तर प्रदेश में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और NHAI की आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि सड़क धंसने की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
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