Last updated: August 8th, 2026 at 03:29 pm

रियाद: तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों देश शुक्रवार को सऊदी अरब में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में हैं। इस घटनाक्रम से तीनों देशों के बीच सैन्य और रणनीतिक सहयोग के और मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।
तीन देशों के बीच मजबूत होगा रक्षा सहयोग
रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले दो क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित समझौता सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच सुरक्षा सहयोग का दायरा बढ़ा सकता है। हालांकि, इस संभावित समझौते को औपचारिक रूप से किसी ‘Islamic NATO’ के रूप में पेश नहीं किया गया है, लेकिन इसके बाद ऐसे किसी क्षेत्रीय रक्षा गठबंधन की चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले ही संकेत दे चुके हैं कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मौजूदा रक्षा एवं आर्थिक सहयोग में दूसरे क्षेत्रीय देशों को शामिल करने की संभावनाओं पर बातचीत हो रही है। उन्होंने तुर्की और कतर जैसे देशों की संभावित भागीदारी का भी उल्लेख किया था।
पाकिस्तान-सऊदी रक्षा साझेदारी पहले से मजबूत
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल एक ‘Strategic Mutual Defense Agreement’ हुआ था। इस व्यवस्था का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। समझौते के तहत किसी एक देश पर होने वाले हमले को दोनों देशों के खिलाफ हमला माना जाने की बात कही गई थी।
यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सऊदी अरब यात्रा के दौरान हुआ था। दोनों देशों ने उस समय अपने लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक और रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाने पर जोर दिया था।
तुर्की की संभावित भूमिका से बढ़ी चर्चा
नए प्रस्तावित समझौते में तुर्की की संभावित भागीदारी ने इसके रणनीतिक महत्व को बढ़ा दिया है। तुर्की पहले से ही पाकिस्तान के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग करता रहा है। ऐसे में तीनों देशों के बीच किसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ गई है।
हालांकि, पाकिस्तान की ओर से यह संकेत दिया गया है कि इस तरह की व्यवस्था किसी अन्य देश को निशाना बनाने के लिए नहीं होगी। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाना और सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करना बताया गया है।
भारत की भी घटनाक्रम पर नजर
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते पर भारत पहले ही अपनी प्रतिक्रिया दे चुका है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नई दिल्ली इस घटनाक्रम के भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा तथा क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अध्ययन करेगी।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया था कि सरकार देश के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। ऐसे में तुर्की के संभावित रूप से इस रक्षा सहयोग में शामिल होने की खबर पर भी रणनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
क्षेत्रीय राजनीति के लिए अहम घटनाक्रम
अगर तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित रक्षा समझौता आगे बढ़ता है, तो इससे पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के बीच रणनीतिक संबंधों का नया समीकरण देखने को मिल सकता है। फिलहाल इस समझौते की वास्तविक शर्तों और दायरे को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
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