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लखनऊ में Facebook दोस्ती के नाम पर ₹68 लाख की साइबर ठगी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक व्यक्ति से कथित तौर पर करीब ₹68 लाख की साइबर ठगी का मामला
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक व्यक्ति से कथित तौर पर करीब ₹68 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगी की शुरुआत Facebook पर एक ऐसी महिला से दोस्ती के जरिए हुई, जिसने खुद को इंग्लैंड की रहने वाली “Doris” बताया था। बाद में यही पहचान एक बड़े साइबर फ्रॉड का हिस्सा निकली।

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    मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित की Facebook पर Doris नाम की महिला से दोस्ती हुई। बातचीत धीरे-धीरे बढ़ी और महिला ने खुद को ब्रिटेन में रहने वाली बताकर पीड़ित का भरोसा हासिल किया।

    कुछ समय बाद महिला ने कथित तौर पर पीड़ित को महंगे gifts भेजने की बात कही। इसके बाद कहानी में एक नया मोड़ आया। पीड़ित को बताया गया कि विदेश से भेजा गया सामान customs अधिकारियों के पास पहुंच गया है और उसे छुड़ाने के लिए अलग-अलग तरह के charges और formalities पूरी करनी होंगी।

    इसी बहाने पीड़ित से लगातार पैसे मांगे जाने लगे। शुरुआत में रकम अपेक्षाकृत कम बताई गई, लेकिन बाद में अलग-अलग charges के नाम पर बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई।

    ठगों ने कथित तौर पर customs clearance, विदेशी currency और अन्य प्रक्रियाओं का हवाला देकर पीड़ित पर भरोसा बनाए रखा। जैसे-जैसे पीड़ित पैसा भेजता गया, उससे नई-नई मांगें की जाती रहीं।

    इस तरह रकम बढ़ते-बढ़ते करीब ₹68 लाख तक पहुंच गई। बाद में जब पीड़ित को शक हुआ और उसने मामले की वास्तविकता समझने की कोशिश की तो उसे पता चला कि जिस महिला से वह Facebook पर बातचीत कर रहा था, उसकी पहचान ही फर्जी थी।

    यह मामला साइबर अपराधियों द्वारा social engineering के इस्तेमाल का उदाहरण है। इसमें अपराधी सीधे पैसे मांगने के बजाय पहले पीड़ित के साथ भावनात्मक या व्यक्तिगत संबंध बनाते हैं और फिर धीरे-धीरे उसे आर्थिक लेनदेन के लिए तैयार करते हैं।

    Facebook और दूसरे social media platforms पर अनजान लोगों से friendship के जरिए होने वाली ऐसी ठगी के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। खासकर विदेशी नागरिक बनकर दोस्ती करने और फिर gift, parcel या customs के नाम पर पैसे मांगने वाला तरीका साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठगों ने कथित तौर पर एक पूरी कहानी तैयार की। पहले friendship, फिर expensive gift और उसके बाद customs authorities का डर दिखाकर पैसे की मांग—इस तरह पीड़ित को लगातार विश्वास में रखा गया।

    Cyber experts आम लोगों को सलाह देते हैं कि social media पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ बातचीत के दौरान personal information और financial details साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति विदेश से gift या parcel भेजने का दावा करे और उसे छुड़ाने के लिए customs, tax या clearance charges के नाम पर पैसे मांगे जाएं तो पहले इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।

    किसी भी व्यक्ति को केवल WhatsApp, Facebook या दूसरे social media messages के आधार पर bank account में बड़ी रकम transfer नहीं करनी चाहिए।

    UP Police ने भी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तुरंत 1930 cyber helpline पर शिकायत करने की अपील की है। ठगी के तुरंत बाद शिकायत करने से रकम को freeze कराने की संभावना बढ़ सकती है।

    लखनऊ का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठग केवल technical methods का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि लोगों की भावनाओं और भरोसे का फायदा उठाकर भी बड़ी रकम हासिल कर सकते हैं।

    करीब ₹68 लाख की रकम गंवाने वाला यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ठगी किसी संदिग्ध link या unknown app से शुरू नहीं हुई, बल्कि एक सामान्य Facebook friendship से शुरू हुई थी।

    फिलहाल यह घटना सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से friendship और online financial transactions को लेकर एक बड़ी चेतावनी है। विदेशी gift, customs clearance या parcel release के नाम पर अचानक पैसे की मांग साइबर फ्रॉड का बड़ा संकेत हो सकती है।

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