Last updated: August 13th, 2026 at 04:12 pm

बिहार पुलिस मुख्यालय ने कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण से जुड़ी ड्यूटी में AK-47, INSAS और SLR जैसी राइफलों के इस्तेमाल को सीमित करने का बड़ा फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत इन हथियारों का इस्तेमाल अब सामान्य law-and-order duties या crowd-control situations में नहीं किया जाएगा।
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी नए निर्देश के अनुसार इन हथियारों को केवल विशेष परिस्थितियों में इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था संभालने के दौरान अत्यधिक घातक हथियारों के इस्तेमाल को नियंत्रित करना बताया जा रहा है।
अब सामान्य भीड़ नियंत्रण, प्रदर्शन, जुलूस या कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों में पुलिस को उपलब्ध अन्य निर्धारित संसाधनों और हथियारों का इस्तेमाल करना होगा। AK-47, INSAS और SLR जैसी राइफलें सामान्य policing के बजाय विशेष परिस्थितियों के लिए सुरक्षित रखी जाएंगी।
बिहार जैसे बड़े और आबादी वाले राज्य में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में समय-समय पर बड़े राजनीतिक प्रदर्शन, जुलूस और कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियां सामने आती रहती हैं। ऐसे में पुलिस के पास उपलब्ध हथियारों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट guidelines होना जरूरी है।
पुलिस बल के पास मौजूद हथियारों का इस्तेमाल उनकी क्षमता और स्थिति के अनुसार किया जाता है। लेकिन crowd-control situations में अत्यधिक घातक हथियारों के इस्तेमाल से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसलिए नए निर्देश के जरिए पुलिस कार्रवाई को situation-specific बनाने की कोशिश की गई है।
नई व्यवस्था के तहत पुलिसकर्मियों को यह स्पष्ट रहेगा कि किस परिस्थिति में कौन सा हथियार इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे field-level officers के लिए decision-making में भी स्पष्टता आने की उम्मीद है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि AK-47, INSAS या SLR को बिहार पुलिस से पूरी तरह हटा दिया गया है। इन हथियारों का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों और निर्धारित मामलों में किया जा सकेगा। यानी गंभीर सुरक्षा परिस्थितियों में इनकी उपयोगिता बनी रहेगी।
पुलिस मुख्यालय का यह कदम पुलिसिंग में proportional response यानी परिस्थिति के अनुरूप कार्रवाई की अवधारणा से भी जुड़ा हुआ है। सामान्य law-and-order situation में कम घातक विकल्पों को प्राथमिकता देने से नागरिकों और पुलिस दोनों की सुरक्षा बेहतर हो सकती है।
भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि कानून-व्यवस्था भी बनी रहे और आम नागरिकों को अनावश्यक नुकसान भी न हो। ऐसे मामलों में पुलिस को भीड़ की स्थिति, हिंसा के स्तर और खतरे को देखकर कार्रवाई करनी पड़ती है।
नई guidelines इसी तरह की परिस्थितियों में हथियारों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।
इसके साथ ही पुलिस प्रशिक्षण की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। जवानों और अधिकारियों को crowd management, negotiation, dispersal techniques और non-lethal methods की पर्याप्त training देनी होगी।
बिहार में आगामी राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों को देखते हुए यह निर्देश पुलिस के लिए व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। बड़े आयोजनों और प्रदर्शनों के दौरान पुलिस को पहले से तय standard operating procedures के अनुसार काम करना होगा।
इस फैसले से यह भी संकेत मिलता है कि पुलिस प्रशासन law-and-order situations में firearms के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा structured approach अपनाना चाहता है।
हालांकि विशेष परिस्थितियों में हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति बरकरार रहेगी। यदि किसी स्थिति में पुलिस या नागरिकों की जान को गंभीर खतरा हो तो निर्धारित नियमों के अनुसार अधिक शक्तिशाली हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
नए निर्देशों के लागू होने के बाद district-level police units को भी अपने deployment और weapon-management procedures को उसी के अनुसार व्यवस्थित करना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे फैसलों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि guidelines को field level पर कितनी स्पष्टता और consistency के साथ लागू किया जाता है। केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा; पुलिसकर्मियों को practical training और स्पष्ट instructions भी देने होंगे।
बिहार पुलिस ने कानून-व्यवस्था और crowd-control duties में AK-47, INSAS और SLR के सामान्य इस्तेमाल पर रोक लगाकर हथियारों के उपयोग को अधिक नियंत्रित करने का फैसला किया है। इन हथियारों को विशेष परिस्थितियों के लिए रखा जाएगा, जबकि सामान्य law-and-order situations में कम घातक विकल्पों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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